रायमिश्रित राय
2014 के बाद के चौबीस मामले: किस पर आरोप, कितना सार्वजनिक धन, और हर मामला कहां खड़ा है
प्रकाशित: 9 अक्टू॰ 2026
इस पर एक संपादकीय राय: 2014 से 2026 तक के बड़े भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के मामले: क्या आरोप थे और हर मामला कहां खड़ा है
नीचे 2014 के बाद के सबसे ज़्यादा चर्चित मामले हैं, हर एक एक ही ढंग से: क्या आरोप था, कौन ज़िम्मेदार था (नाम नहीं, भूमिका), कितना सार्वजनिक धन या सरकार की भूमिका थी, क्या साबित हुआ, और अब स्थिति क्या है। नाम जान-बूझकर नहीं दिए गए, और कई मामले अपराध नहीं बल्कि ऑडिट या संवैधानिक निष्कर्ष हैं।
1. पंजाब नेशनल बैंक धोखाधड़ी (2018)
• आरोप: एक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के साथ लगभग ₹13,000 करोड़ की धोखाधड़ी।
• ज़िम्मेदार (केवल भूमिका): CBI के अनुसार दो हीरा व्यापारी (एक प्रवर्तक और उनके रिश्तेदार/साझेदार)।
• सरकारी धन / सरकार की भूमिका: सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक (PNB)।
• साबित हुआ?: भारत में अभी मुक़दमा पूरा नहीं; ब्रिटेन की अदालतों ने एक व्यापारी के प्रत्यर्पण की मंज़ूरी दी (दिसंबर 2022 में अंतिम अपील ख़ारिज) और बेल्जियम की अदालतों ने दूसरे का रास्ता साफ़ किया (बेल्जियम की सर्वोच्च अदालत ने अपील ख़ारिज की; एंटवर्प अदालत ने 3 अप्रैल 2026 को प्रत्यर्पण की सलाह दी; अंतिम निर्णय गृह मंत्रालय के पास)।
• अंतिम नतीजा: अनसुलझा। एक आरोपी वापसी तक लंदन की जेल में है; एक सहयोगी सितंबर 2026 में UAE से प्रत्यर्पित हुआ।
2. किंगफ़िशर एयरलाइंस ऋण (2016 से)
• आरोप: बैंकों से लिए गए लगभग ₹9,000 करोड़ के ऋण वापस नहीं हुए; आरोपों में धोखाधड़ी और धन-शोधन शामिल।
• ज़िम्मेदार (केवल भूमिका): एयरलाइन के चेयरमैन और प्रवर्तक।
• सरकारी धन / सरकार की भूमिका: सार्वजनिक क्षेत्र के ऋणदाताओं सहित बैंकों का समूह।
• साबित हुआ?: भारत में मुक़दमा नहीं; आरोपी विदेश में।
• अंतिम नतीजा: ब्रिटिश अदालतों और गृह सचिव ने प्रत्यर्पण मंज़ूर किया (2018–19), पर अब तक नहीं हुआ; 2024 में मुंबई अदालत ने ग़ैर-ज़मानती वारंट जारी किया।
3. IL&FS चूक (2018)
• आरोप: एक इन्फ्रास्ट्रक्चर वित्तदाता अगस्त 2018 से चूक में गया; गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) ने ₹90,000 करोड़ से अधिक के चूक वाले खाते चिह्नित किए।
• ज़िम्मेदार (केवल भूमिका): समूह का प्रबंधन और प्रवर्तक, SFIO जांच के अधीन।
• सरकारी धन / सरकार की भूमिका: देखे गए स्रोतों में पुष्ट नहीं।
• साबित हुआ?: जांच जारी; देखे गए स्रोतों में कोई फ़ैसला नहीं मिला।
• अंतिम नतीजा: देखे गए स्रोतों में अनसुलझा।
4. DHFL बैंक ऋण धोखाधड़ी (2022 में मामला दर्ज)
• आरोप: एक हाउसिंग फ़ाइनेंस कंपनी ने 2019 से ऋण चूक के ज़रिये 17 बैंकों के समूह को ₹34,615 करोड़ का चूना लगाया (CBI के अनुसार सबसे बड़ी बैंक धोखाधड़ी)।
• ज़िम्मेदार (केवल भूमिका): कंपनी के प्रवर्तक/निदेशक।
• सरकारी धन / सरकार की भूमिका: 17 बैंक (सरकारी और निजी ऋणदाता)।
• साबित हुआ?: CBI मामला; देखे गए स्रोतों में कोई फ़ैसला नहीं मिला।
• अंतिम नतीजा: मई 2024 में एक प्रवर्तक-निदेशक गिरफ़्तार; देखे गए स्रोतों में मुक़दमा लंबित।
5. जेन्सोल / ब्लूस्मार्ट निधि हेराफेरी (2025)
• आरोप: दो सार्वजनिक क्षेत्र के ऋणदाताओं से EV के लिए लिए गए ₹978 करोड़ में से लगभग ₹262 करोड़ का हिसाब नहीं; कुछ रक़म से कथित तौर पर महंगा फ़्लैट ख़रीदा गया।
• ज़िम्मेदार (केवल भूमिका): SEBI के अनुसार कंपनी के प्रवर्तक।
• सरकारी धन / सरकार की भूमिका: IREDA और PFC (दोनों सार्वजनिक क्षेत्र) के ऋण।
• साबित हुआ?: SEBI के निष्कर्ष; कोई आपराधिक फ़ैसला नहीं मिला।
• अंतिम नतीजा: SEBI ने प्रवर्तकों को प्रतिभूति बाज़ार से प्रतिबंधित किया; राइड-हेलिंग इकाई ढह गई।
6. बायजूस धोखाधड़ीपूर्ण हस्तांतरण (अमेरिकी अदालत, 2025)
• आरोप: अमेरिकी दिवालिया अदालत ने बायजूस अल्फ़ा की इकाइयों द्वारा $533 मिलियन के धोखाधड़ीपूर्ण हस्तांतरण पाए।
• ज़िम्मेदार (केवल भूमिका): बायजूस अल्फ़ा इंक. और संबद्ध इकाइयां।
• सरकारी धन / सरकार की भूमिका: निजी एडटेक समूह; भारतीय सार्वजनिक धन नहीं।
• साबित हुआ?: हां — अमेरिकी अदालत का दीवानी निष्कर्ष (28 फ़रवरी 2025)।
• अंतिम नतीजा: दीवानी फ़ैसला; भारतीय कार्यवाही का सार देखे गए स्रोतों में नहीं।
7. NSE को-लोकेशन (2015 से)
• आरोप: कुछ ब्रोकरों को एक्सचेंज अधिकारियों की मदद से सर्वरों तक तेज़ पहुंच मिलने का आरोप।
• ज़िम्मेदार (केवल भूमिका): एक्सचेंज के पूर्व अधिकारियों की जांच हुई; एक ब्रोकर कथित लाभार्थी।
• सरकारी धन / सरकार की भूमिका: बाज़ार ढांचा संस्था; देखे गए स्रोतों में सीधा सरकारी धन नहीं।
• साबित हुआ?: नियामक स्तर पर नहीं — SEBI ने पाया कि मिलीभगत के लिए 'संभावना की प्रधानता' का मानक पूरा नहीं हुआ।
• अंतिम नतीजा: SEBI ने एक्सचेंज और पूर्व अधिकारियों पर आरोप वापस लिए; SAT ने लगभग ₹625 करोड़ की वापसी का आदेश रद्द किया। CBI का मामला (पूर्व सीईओ 2022 में गिरफ़्तार) अलग है।
8. एक समूह पर हिंडनबर्ग आरोप (2023)
• आरोप: एक शॉर्ट-सेलर ने शेयर हेरफेर और संबंधित पक्षों के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
• ज़िम्मेदार (केवल भूमिका): आरोप के अनुसार समूह का प्रवर्तक परिवार।
• सरकारी धन / सरकार की भूमिका: निजी सूचीबद्ध कंपनियां; सीधा सरकारी धन नहीं।
• साबित हुआ?: नहीं — SEBI ने सितंबर 2025 में कोई उल्लंघन नहीं पाया।
• अंतिम नतीजा: सितंबर 2025 में SEBI ने समूह को क्लीन चिट दी।
9. सौर अनुबंधों पर अमेरिकी अभियोग (नवंबर 2024, अंतरराष्ट्रीय)
• आरोप: अमेरिकी अभियोग में भारत सरकार द्वारा दिए गए सौर-ऊर्जा अनुबंधों से जुड़ी रिश्वत और अमेरिकी निवेशकों के साथ प्रतिभूति धोखाधड़ी का आरोप लगा।
• ज़िम्मेदार (केवल भूमिका): अमेरिकी अभियोजकों के अनुसार उसी समूह के चेयरमैन और सहयोगी।
• सरकारी धन / सरकार की भूमिका: सरकारी सौर अनुबंध (सार्वजनिक क्षेत्र की एजेंसी के ज़रिये)।
• साबित हुआ?: किसी अदालत ने दोष तय नहीं किया; SEC का दीवानी मामला कथित तौर पर $18 मिलियन में निपटा (मई 2026) और मीडिया के अनुसार आपराधिक आरोप वापस हो सकते हैं — यह अपुष्ट।
• अंतिम नतीजा: दीवानी समझौता दर्ज; आपराधिक स्थिति की पुष्टि बाकी।
10. राफ़ेल लड़ाकू विमान सौदा (2018–19)
• आरोप: याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि 36 विमानों के सौदे में क़ीमत और निर्णय-प्रक्रिया आपूर्तिकर्ता के पक्ष में थी।
• ज़िम्मेदार (केवल भूमिका): किसी व्यक्ति को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया गया; आरोप ख़रीद-निर्णय पर था।
• सरकारी धन / सरकार की भूमिका: विदेशी सरकार/आपूर्तिकर्ता से सरकारी रक्षा ख़रीद।
• साबित हुआ?: नहीं — सुप्रीम कोर्ट को वाणिज्यिक पक्षपात या निर्णय-प्रक्रिया पर संदेह का कारण नहीं मिला।
• अंतिम नतीजा: सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाएं (14 दिसंबर 2018) और पुनर्विचार (नवंबर 2019) ख़ारिज किए। फ़रवरी 2019 में पेश CAG रिपोर्ट और अदालत के उससे पहले के हवाले पर प्रक्रियात्मक विवाद हुआ।
11. चुनावी बॉन्ड (2024 में रद्द)
• आरोप: बॉन्ड के ज़रिये गुमनाम राजनीतिक चंदा, जिसे मतदाताओं के सूचना के अधिकार का उल्लंघन बताकर चुनौती दी गई; दलों ने लगभग ₹16,518 करोड़ भुनाए।
• ज़िम्मेदार (केवल भूमिका): कोई व्यक्ति नहीं — सरकार और संसद द्वारा बनी योजना ही चुनौती में थी।
• सरकारी धन / सरकार की भूमिका: सरकार की बनाई योजना, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के ज़रिये बिकी।
• साबित हुआ?: संवैधानिकता पर हां — यह आपराधिक निष्कर्ष नहीं है।
• अंतिम नतीजा: 15 फ़रवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने योजना को असंवैधानिक बताकर रद्द किया; पुनर्विचार याचिका ख़ारिज हुई।
12. पेगासस जासूसी सॉफ़्टवेयर आरोप (2021–22)
• आरोप: आरोप कि नागरिकों, पत्रकारों और नेताओं की जासूसी के लिए स्पाइवेयर इस्तेमाल हुआ।
• ज़िम्मेदार (केवल भूमिका): किसी व्यक्ति को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया गया।
• सरकारी धन / सरकार की भूमिका: कथित तौर पर सरकारी एजेंसियों द्वारा।
• साबित हुआ?: स्थापित नहीं — सुप्रीम कोर्ट के तकनीकी पैनल ने 29 में से 5 फ़ोन में मैलवेयर पाया, पर पक्के तौर पर पेगासस नहीं।
• अंतिम नतीजा: पैनल ने कहा कि केंद्र ने सहयोग नहीं किया; अदालत ने अवैध निगरानी पर कोई फ़ैसला नहीं दिया।
13. द्वारका एक्सप्रेसवे लागत (CAG, अगस्त 2023)
• आरोप: CAG ने कहा कि प्रति किमी सिविल लागत ₹250.77 करोड़ रही, जबकि पहले ₹18.2 करोड़ प्रति किमी मंज़ूर थी — कुल मिलाकर ₹7,287 करोड़ तक 14 गुना बढ़ोतरी।
• ज़िम्मेदार (केवल भूमिका): कोई व्यक्ति आरोपित नहीं; परियोजना के डिज़ाइन और मंज़ूरी पर ऑडिट निष्कर्ष।
• सरकारी धन / सरकार की भूमिका: राजमार्ग प्राधिकरण के ज़रिये सार्वजनिक धन।
• साबित हुआ?: ऑडिट निष्कर्ष, क़ानूनी निष्कर्ष नहीं; मंत्रालय ने तुलना को 'त्रुटिपूर्ण' कहा।
• अंतिम नतीजा: मंत्रालय ने स्पष्टीकरण जारी किया; कोई जांच या फ़ैसला नहीं मिला।
14. भारतमाला निविदा अनियमितताएं (CAG)
• आरोप: CAG ने निविदा नियमों के उल्लंघन पाए, जिनमें शर्तें पूरी न करने वाले विजेता बोलीदाता और बिना उचित रिपोर्ट या ज़मीन उपलब्धता के दिए गए ठेके शामिल थे।
• ज़िम्मेदार (केवल भूमिका): कोई व्यक्ति आरोपित नहीं; क्रियान्वयन एजेंसियों की ख़ामियां बताई गईं।
• सरकारी धन / सरकार की भूमिका: राजमार्ग एजेंसियों के ज़रिये सार्वजनिक धन।
• साबित हुआ?: ऑडिट निष्कर्ष, क़ानूनी निष्कर्ष नहीं।
• अंतिम नतीजा: संसदीय समिति ने सलाहकारों के काम की आगे CAG ऑडिट की सिफ़ारिश की।
15. आयुष्मान भारत दावे (CAG)
• आरोप: CAG ने मृत दर्ज मरीज़ों के नाम पर दावों का भुगतान और कम से कम 7.5 लाख लाभार्थियों का एक ही मोबाइल नंबर से जुड़ा होना पाया।
• ज़िम्मेदार (केवल भूमिका): कोई व्यक्ति आरोपित नहीं; अस्पतालों और योजना-नियंत्रण की ख़ामियां बताई गईं।
• सरकारी धन / सरकार की भूमिका: सार्वजनिक स्वास्थ्य-बीमा धन।
• साबित हुआ?: ऑडिट निष्कर्ष, क़ानूनी निष्कर्ष नहीं।
• अंतिम नतीजा: देखे गए स्रोतों में कोई अदालती नतीजा नहीं मिला।
16. तमिलनाडु राज्य शराब निगम (2025)
• आरोप: ED ने आरोप लगाया कि हेरफेर वाली निविदाओं और बढ़े ख़र्चों से ₹1,000 करोड़ से अधिक निकाले गए।
• ज़िम्मेदार (केवल भूमिका): ED द्वारा कथित एक नेटवर्क; कोई व्यक्ति ज़िम्मेदार साबित नहीं।
• सरकारी धन / सरकार की भूमिका: राज्य-संचालित शराब खुदरा निगम का धन।
• साबित हुआ?: नहीं — आरोप के चरण में।
• अंतिम नतीजा: देखे गए स्रोतों में जांच जारी।
17. NEET-UG 2024 पेपर लीक
• आरोप: मेडिकल प्रवेश परीक्षा का प्रश्नपत्र परीक्षा से पहले कथित तौर पर लीक हुआ, जिसे लगभग 23 लाख छात्रों ने दिया था।
• ज़िम्मेदार (केवल भूमिका): CBI के पहले आरोपपत्र (1 अगस्त 2024, 13 आरोपी) के अनुसार दो कथित सरग़ना, कुछ उम्मीदवार और एक जूनियर इंजीनियर।
• सरकारी धन / सरकार की भूमिका: सरकारी एजेंसी द्वारा आयोजित राष्ट्रीय परीक्षा; सार्वजनिक धन की चोरी का आरोप नहीं।
• साबित हुआ?: आंशिक रूप से — सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि लीक दो शहरों (पटना और हज़ारीबाग) तक सीमित था, व्यापक उल्लंघन नहीं; आरोपियों का दोष मुक़दमे का विषय है।
• अंतिम नतीजा: 23 जुलाई 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा रद्द करने से इनकार किया; CBI मुक़दमे का नतीजा देखे गए स्रोतों में नहीं मिला।
18. ऑनलाइन सट्टेबाज़ी ऐप धन-शोधन
• आरोप: एक अवैध सट्टेबाज़ी ऐप नेटवर्क ने परतदार बेनामी खातों से कथित धन-शोधन किया; ED इस मामले को लगभग ₹15,000 करोड़ से जोड़ती है।
• ज़िम्मेदार (केवल भूमिका): ED के अनुसार दुबई-स्थित इकाइयों के ज़रिये काम करने वाले ऐप के प्रवर्तक।
• सरकारी धन / सरकार की भूमिका: निजी; सार्वजनिक धन का आरोप नहीं।
• साबित हुआ?: अभी नहीं — ED चार आरोपपत्र दाख़िल कर चुकी और 11 लोग गिरफ़्तार; कोई फ़ैसला नहीं।
• अंतिम नतीजा: ED अब तक ₹2,295.61 करोड़ की संपत्ति फ़्रीज़, कुर्क या ज़ब्त कर चुकी; देखे गए स्रोतों में मुक़दमा लंबित।
19. दिल्ली आबकारी (शराब) नीति (2022 से)
• आरोप: राज्य की आबकारी नीति के निर्माण में कथित साज़िश और कमीशन।
• ज़िम्मेदार (केवल भूमिका): CBI के आरोप के अनुसार तत्कालीन मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और 21 अन्य।
• सरकारी धन / सरकार की भूमिका: राज्य का आबकारी राजस्व और नीति।
• साबित हुआ?: अब तक नहीं — निचली अदालत ने कोई व्यापक साज़िश या आपराधिक इरादा नहीं पाया और कहा कि अभियोजन का मामला अनुमान पर टिका है।
• अंतिम नतीजा: 27 फ़रवरी 2026 को दिल्ली की अदालत ने सभी 23 आरोपियों को डिस्चार्ज किया। CBI ने चुनौती दी; हाईकोर्ट ने CBI के विरुद्ध निचली अदालत की टिप्पणियों पर रोक लगाई और नोटिस जारी किया। ED का धन-शोधन मुक़दमा इस चुनौती के फ़ैसले तक टला।
20. छत्तीसगढ़ आबकारी विभाग सिंडिकेट (2019–23)
• आरोप: एक सिंडिकेट ने 2019–23 में राज्य के शराब कारोबार से कथित तौर पर लगभग ₹2,161 करोड़ की अवैध कमाई की; बाद की रिपोर्टें इसे ₹3,200 करोड़ से ऊपर बताती हैं।
• ज़िम्मेदार (केवल भूमिका): ED के अनुसार आबकारी अधिकारी, आबकारी आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार संभालने वाले एक IAS अधिकारी और निजी संचालक।
• सरकारी धन / सरकार की भूमिका: राज्य का आबकारी राजस्व और सरकारी शराब व्यवस्था।
• साबित हुआ?: अभी नहीं — ED की जांच पूरी; मुक़दमा शुरू होने वाला है।
• अंतिम नतीजा: ED ने 27 दिसंबर 2025 को अंतिम अभियोजन शिकायत दाख़िल की (29,800+ पन्ने, 80+ आरोपी); राज्य के आरोपपत्र में नामित 22 आबकारी अधिकारी निलंबित हुए।
21. येस बैंक ऋण (2020)
• आरोप: तनावग्रस्त उधारकर्ताओं को लाभ के बदले कथित तौर पर ऋण दिए गए; ED ने लगभग ₹30,000 करोड़ के डूबे ऋणों की जांच की।
• ज़िम्मेदार (केवल भूमिका): ED और CBI के अनुसार बैंक के संस्थापक-मुख्य कार्यकारी।
• सरकारी धन / सरकार की भूमिका: निजी बैंक; जमाकर्ता और बैंकिंग प्रणाली प्रभावित।
• साबित हुआ?: अभी नहीं — CBI आरोपपत्र दाख़िल; कोई फ़ैसला नहीं मिला।
• अंतिम नतीजा: संस्थापक लगभग चार साल जेल में रहे और अप्रैल 2024 में आख़िरी लंबित मामले (₹466.51 करोड़) में ज़मानत मिली; ₹2,796 करोड़ का अलग CBI मामला 2025 के अंत में संज्ञान के चरण में था।
22. ABG शिपयार्ड बैंक धोखाधड़ी (FIR 2022)
• आरोप: एक जहाज़-निर्माता पर SBI के नेतृत्व वाले 28 बैंकों के समूह से ₹22,842 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप।
• ज़िम्मेदार (केवल भूमिका): CBI के अनुसार कंपनी, उसके संस्थापक-चेयरमैन और निदेशक।
• सरकारी धन / सरकार की भूमिका: 28 बैंक, जिनका नेतृत्व सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक कर रहा था।
• साबित हुआ?: अभी नहीं — देखे गए स्रोतों में कोई फ़ैसला नहीं मिला।
• अंतिम नतीजा: CBI ने 7 फ़रवरी 2022 को FIR दर्ज की और सितंबर 2022 में संस्थापक-चेयरमैन को गिरफ़्तार किया।
23. सहकारी बैंक और रियल-एस्टेट डेवलपर धोखाधड़ी (2019)
• आरोप: एक सहकारी बैंक के एक ही डेवलपर को दिए गए ऋण, जो नियामक से छिपाए गए, ₹6,117.93 करोड़ की धोखाधड़ी में बदले।
• ज़िम्मेदार (केवल भूमिका): डेवलपर के प्रवर्तक और बैंक के पूर्व अधिकारी।
• सरकारी धन / सरकार की भूमिका: सहकारी बैंक के जमाकर्ताओं का धन; RBI ने निकासी पर पाबंदी लगाई।
• साबित हुआ?: अभी नहीं — देखे गए स्रोतों में कोई फ़ैसला नहीं मिला।
• अंतिम नतीजा: अप्रैल 2024 में लंबी हिरासत और मुक़दमे में देरी के आधार पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने डेवलपर के प्रवर्तकों को ज़मानत दी; ED ने संपत्तियां कुर्क कीं।
24. राज्य स्कूल-नौकरी भर्ती धोखाधड़ी (2016 पैनल)
• आरोप: स्कूल-भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर हेरफेर: रैंक में छलांग, अंकों में बदलाव, पैनल से बाहर के उम्मीदवारों को नियुक्ति पत्र, और पैनल की अवधि ख़त्म होने के बाद नियुक्तियां।
• ज़िम्मेदार (केवल भूमिका): CBI की जांच के अनुसार राज्य भर्ती आयोग और शिक्षा विभाग के अधिकारी, बिचौलिए और उम्मीदवार।
• सरकारी धन / सरकार की भूमिका: राज्य सरकार की नौकरियां — सरकारी और सहायता-प्राप्त स्कूलों में 25,753 शिक्षक और गैर-शिक्षक नियुक्तियां।
• साबित हुआ?: आंशिक रूप से — सुप्रीम कोर्ट ने इसे 'व्यवस्थागत धोखाधड़ी' कहा; आपराधिक दोष मुक़दमे का विषय है।
• अंतिम नतीजा: हाईकोर्ट ने 25,753 नियुक्तियां रद्द कीं; सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में उस आदेश पर रोक लगाई और CBI जांच जारी रखने दी (फ़िलहाल कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं)। अंतिम नतीजा अपुष्ट — प्रकाशन से पहले पुष्टि करें।
ईमानदारी से यह सूची क्या दिखाती है: इनमें बहुत कम का अंतिम फ़ैसला आया है, इसलिए यह सूची अभी नहीं बता सकती कि कौन सही था। कुछ आरोप नियामक या सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज किए; कुछ में जांच चल रही है; कई ऑडिट निष्कर्ष हैं जिन पर ऑडिट किए गए मंत्रालय ने आपत्ति जताई। पुरानी सूची के नतीजों को इसके सामने रखकर न पढ़ें — उन्हें दशकों मिले, इन्हें अधिकतम कुछ साल।
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