रायमिश्रित राय
गिग श्रमिक अब क़ानून में हैं। कसौटी यह है कि उन्हें वास्तव में क्या मिलता है
प्रकाशित: 18 अक्टू॰ 2026
इस पर एक संपादकीय राय: सामाजिक सुरक्षा संहिता 21 नवंबर 2025 से लागू होने पर गिग श्रमिकों को क़ानूनी परिभाषा — जनवरी तक 12 और जून 2026 तक 15 प्लेटफ़ॉर्म जुड़े, पर पंजीकृत श्रमिकों की कोई गिनती नहीं
पहली बार भारतीय क़ानून डिलीवरी राइडर और कैब चालक का नाम लेता है। 21 नवंबर 2025 से लागू सामाजिक सुरक्षा संहिता गिग और प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों को परिभाषित करती है, दुर्घटना, स्वास्थ्य और वृद्धावस्था सुरक्षा जैसे लाभों का वादा करती है, और उनके भुगतान के लिए कोष बनाती है। श्रम मंत्रालय ने अपने e-Shram पोर्टल पर 12 और बाद में 15 प्रमुख प्लेटफ़ॉर्म जोड़े, और जून 2026 में बाक़ियों के लिए समय-सीमा तय की। यह असली प्रगति है, और इस तरह काम करने वाले लाखों युवाओं के लिए मायने रखती है।
पर संसद को जनवरी 2026 का उत्तर इसलिए ध्यान खींचता है कि उसमें क्या नहीं है। उसमें कितने गिग या प्लेटफ़ॉर्म श्रमिक पंजीकृत हैं इसका कोई आंकड़ा नहीं, किसी को लाभ मिलने का कोई आंकड़ा नहीं, और कोष की तारीख़ या राशि नहीं। वह एक अनुमान का हवाला देता है कि यह समूह 2020-21 में 77 लाख था और 2029-30 तक 2.35 करोड़ हो सकता है, जो बताता है कि वादा कितना बड़ा है, यह नहीं कि कितना पूरा हुआ। पंजीकरण स्व-घोषित है, इसलिए गिनती पहुँच दिखाएगी, कवरेज नहीं।
निष्पक्ष राय है कि ढाँचा सचमुच एक क़दम है और वादा लाभ नहीं होता। जो माप मामला तय करेंगे वे सरल हैं: पंजीकृत श्रमिक, स्वास्थ्य कवर वाले श्रमिक, चुकाए गए दावे, और प्लेटफ़ॉर्मों से माँगा गया योगदान। जब तक ये प्रकाशित नहीं होते, गिग श्रमिक को पंजीकरण करा लेना चाहिए, क्योंकि पंजीकरण दरवाज़ा है, और पाठक बाक़ी को इरादे के रूप में रखें।