राजस्थान सरकार ने मेवाड़ के संस्थापक बप्पा रावल के सम्मान में पैनोरमा बनवाया
प्रकाशित: 23 सित॰ 2026
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रिपोर्ट की गई निर्माण लागत
आधिकारिक राजस्थान सरकार वेबसाइट
₹151.46 लाख
स्थानीय मीडिया (उदयपुरब्लॉग) आंकड़ा
₹1.71 करोड़
उद्घाटन से सार्वजनिक पहुंच तक का समय
उद्घाटन
अगस्त 2018 (मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे द्वारा)
आम जनता के लिए खुला
फरवरी 2020 (स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार)
उदयपुर के पास एक असली, सरकार-निर्मित, ₹1.5-1.7 करोड़ का हेरिटेज स्थल मेवाड़ के अर्ध-ऐतिहासिक संस्थापक के नाम पर मौजूद है — पैमाने में छोटा, और किसी दावा किए गए प्रधानमंत्री भाषण-संदर्भ से अलग, जिसकी पुष्टि नहीं हो सकी।
उदयपुर के निकट एक राज्य-वित्तपोषित स्मारक
राजस्थान हेरिटेज संरक्षण एवं संवर्धन प्राधिकरण ने उदयपुर जिले की गिरवा तहसील के माथाथा गांव में (उदयपुर शहर से लगभग 22 किमी दूर) बप्पा रावल की परंपरागत समाधि के निकट एक पैनोरमा बनवाया। इसमें घोड़े पर सवार बप्पा रावल की 15 फुट ऊंची गनमेटल प्रतिमा है, और उनके जीवन को 2डी, 3डी व मुद्रित रूपों में दर्शाया गया है। राजस्थान सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर इसकी लागत ₹151.46 लाख दर्ज है, जबकि स्थानीय मीडिया (उदयपुरब्लॉग) ने ₹1.71 करोड़ की लागत बताई है — दोनों आंकड़ों में अंतर है, जिसे यह प्रविष्टि ईमानदारी से दर्ज करती है। तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अगस्त 2018 में इसका उद्घाटन किया, लेकिन स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार यह आम जनता के लिए फरवरी 2020 में ही खुला — यानी उद्घाटन और सार्वजनिक पहुंच के बीच लगभग डेढ़ साल का अंतर रहा। वयस्कों के लिए ₹10 और 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए ₹5 का प्रवेश शुल्क है। यह परियोजना प्राधिकरण के व्यापक कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसके तहत 2018 से अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत के नेतृत्व में राजस्थान भर के विभिन्न क्षेत्रीय नायकों, स्वतंत्रता सेनानियों और लोक देवताओं के सम्मान में करीब 50 पैनोरमा/प्रतिमाएं बनाई गईं।
बप्पा रावल कौन थे, और वास्तव में क्या स्थापित है
बाद के मेवाड़ी इतिहास-वृत्तांतों और राजपूत वंशावली परंपराओं में — जो बप्पा रावल के कथित 8वीं शताब्दी के शासनकाल के सदियों बाद संकलित की गईं — उन्हें गुहिल/सिसोदिया वंश का संस्थापक और क्षेत्र में आक्रमणों से लड़ने वाला शासक बताया गया है। इतिहासकार इस बात को रेखांकित करते हैं कि उनके बारे में अधिकांश विशिष्ट विवरण — जैसे शासनकाल की सटीक तिथियां (जिन पर अलग-अलग परंपरागत स्रोतों में मतभेद है) और उन्हें दिए गए विशिष्ट श्रेय — मुख्यतः इन्हीं बाद की वृत्तांत/परंपरागत सामग्री से आते हैं, न कि समकालीन शिलालेखीय या दस्तावेजी अभिलेखों से। यही कारण है कि पेशेवर इतिहासकार इस कथा-सामग्री के बड़े हिस्से को परंपरागत/लोक-कथात्मक प्रकृति का मानते हैं, न कि सुनिश्चित तथ्य — यह प्रविष्टि इस परंपरा को कितना श्रेय दिया जाए, इस पर कोई रुख नहीं अपनाती। इस प्रविष्टि के लिए प्रधानमंत्री मोदी के किसी भाषण में बप्पा रावल के सटीक तिथि व उद्धरण सहित उल्लेख की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी, इसलिए ऐसा कोई दावा यहां शामिल नहीं किया गया है।
स्थानीय स्तर पर इसका क्या मतलब रहा
उदयपुर से करीब 22 किमी दूर स्थित छोटे से गांव माथाथा के लिए, इस पैनोरमा ने एक भुगतान-आधारित पर्यटक आकर्षण, गाइड व विक्रेताओं के लिए आय, और स्कूली भ्रमण के अवसर दिए हैं। पैमाने में यह छोटा है — दो करोड़ रुपये से कम का एक ही स्थल, जिला-स्तर पर बदलाव लाने वाला निवेश नहीं — लेकिन ग्रामीण राजस्थान के एक गांव की अर्थव्यवस्था और स्थानीय स्तर पर क्षेत्र के अपने इतिहास को कैसे दिखाया/पढ़ाया जाता है, इसमें यह एक ठोस, यद्यपि मामूली, योगदान है। इस परियोजना का कोई सार्थक वैश्विक-क्षमता या कूटनीतिक प्रभाव (मैक्रो स्तर) नहीं है, और इसे गढ़ने का कोई प्रयास इस प्रविष्टि में नहीं किया गया है।
स्रोत
- Bappa Rawal Panoramam, Mathatha, UdaipurGovernment of Rajasthan, Department of Art and CultureOfficial / primary source
- Bappa Rawal Panorama at Mathatha opens for public visitUdaipurBlogSecondary source
- Bappa RawalWikipediaSecondary source
- Onkar Singh LakhawatWikipediaSecondary source
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