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EOS-05: भारत का पहला भू-समकालिक कक्षा से पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह GSLV-F17 से सफलतापूर्वक स्थापित

प्रकाशित: 16 सित॰ 2026

अग॰ 2026अग॰ 2026

पहले बनाम अभी

GSLV प्रक्षेपण यान की उड़ान संख्या

पहली GSLV उड़ान

1

GSLV-F17 (EOS-05 मिशन)

19वीं उड़ान

भारत के पास अब एक ऐसा पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह है जो हमेशा भारतीय क्षेत्र पर नज़र रखता है, बजाय इसके कि वह दिन में सिर्फ़ कुछ बार गुज़रे — यह मौसम, आपदा और कृषि निगरानी के लिए एक नई तरह की क्षमता है।

क्या हासिल हुआ

GSLV-F17 ने 29 अगस्त 2026 को सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा के दूसरे लॉन्च पैड से उड़ान भरी और EOS-05 उपग्रह को तय कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया। ISRO के अनुसार यह इस रॉकेट (GSLV) की 19वीं उड़ान थी, जो इस प्रक्षेपण यान की परिपक्वता को दिखाती है। EOS-05 को ISRO ने 'अत्याधुनिक पृथ्वी-अवलोकन अंतरिक्ष यान' बताया है।

यह पहले से अलग क्यों है

अब तक भारत के ज़्यादातर पृथ्वी-अवलोकन उपग्रह ध्रुवीय कक्षा में रहे हैं, जो पृथ्वी का चक्कर लगाते हुए किसी एक जगह पर दिन में सिर्फ़ एक-दो बार से गुज़रते हैं। EOS-05, ISRO के अनुसार, भारत का पहला ऐसा इमेजिंग उपग्रह है जो भू-समकालिक कक्षा से काम करता है — यानी यह पृथ्वी के घूर्णन के साथ तालमेल बिठाकर भारतीय क्षेत्र पर लगातार, स्थिर नज़र रख सकता है। इसका सीधा मतलब है चक्रवात, बाढ़ या जंगल की आग जैसी तेज़ी से बदलने वाली घटनाओं की कहीं ज़्यादा बार-बार और लगातार निगरानी।

आम लोगों के लिए इसका मतलब

जिस क्षेत्र में कोई चक्रवात या भारी बारिश आ रही हो, वहां लगातार सैटेलाइट निगरानी का मतलब है मौसम विभाग और आपदा प्रबंधन एजेंसियों तक जल्दी और बार-बार अपडेट होने वाली जानकारी — जो चेतावनी जारी करने और लोगों को समय पर सुरक्षित निकालने के फ़ैसलों को बेहतर बना सकती है। यह क्षमता कृषि निगरानी के लिए भी उपयोगी हो सकती है, जैसे फ़सल की सेहत या सूखे की स्थिति पर लगातार नज़र रखना।

ISROEOS-05पृथ्वी-अवलोकनGSLV

स्रोत

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