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मिश्रित प्रभाव

भारत का कूटनीतिक रिकॉर्ड: पड़ोस, खाड़ी और रणनीतिक संतुलन — क्या जीता, क्या खोया

प्रकाशित: 9 अक्टू॰ 2026

अप्रैल 1954अक्टू॰ 2026

पड़ोस के प्रसंगों में भारत का रिकॉर्ड सबसे मिश्रित है: 2022 में श्रीलंका के संकट में वह पहला मददगार था, पर 2015 और 2020 में नेपाल में सद्भाव खोया। उसके रणनीतिक संतुलन के फ़ैसलों (रूस, ईरान, इज़राइल, खाड़ी) में हर एक का फ़ायदा और क़ीमत दोनों रहे, और क़ीमत दूसरे देशों के प्रतिबंधों या शुल्कों के रूप में आई।

इस रिकॉर्ड को कैसे पढ़ें

हर प्रसंग को संपादकीय निर्णय से जीत, नुकसान या मिश्रित चिह्नित किया गया है। देशों और संस्थाओं के नाम हैं; व्यक्तियों के नहीं। सीमा और संघर्ष के तथ्य दर्ज रूप में हैं, किसी देश की मंशा का आकलन किए बिना। हर प्रसंग का ब्योरा साथ के संपादकीय में है। यह सूची 2014 से पहले और 2014–2026 की सूचियों की पूरक है, उनके साथ गिनी नहीं गई।

जीतें

गोवा की मुक्ति (1961); श्रीलंका के आर्थिक संकट में मदद (2022); खाड़ी साझेदारियां और खाड़ी में भारतीय

नुकसान

नेपाल आपूर्ति नाकाबंदी (2015); लिपुलेख पर नेपाल का नया नक्शा (2020)

मिश्रित नतीजे

चीन के साथ पंचशील समझौता (1954); भारत–सोवियत संधि (1971); सिक्किम का भारत में विलय (1975); ईरान का चाबहार बंदरगाह (2016–2026); रूस–यूक्रेन युद्ध पर तटस्थता (2022 से); भारत–मध्य पूर्व–यूरोप आर्थिक गलियारा (2023 में घोषित); इज़राइल से संबंध और फ़िलिस्तीन के बीच संतुलन (2017–2023)

अब भी शामिल नहीं

भूटान, म्यांमार, 2021 से पहले का अफ़ग़ानिस्तान, दोनों मुख्य सूचियों के बाहर पाकिस्तान से जुड़ी कूटनीति, ईरान–इज़राइल संघर्ष का असर, 2019 में जम्मू-कश्मीर के बदलाव, अफ़्रीका और मध्य एशिया की पहुंच, और संयुक्त राष्ट्र में भारत की सीट का इतिहास।

कूटनीतिविदेश नीति

स्रोत

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आख़िरी बार सत्यापित: 9 अक्टू॰ 2026

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