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मिश्रित प्रभाव

NCERT ने प्राचीन-मध्यकालीन इतिहास के अध्याय बदले, मुगलकालीन सामग्री घटाई और नए सिरे से प्रस्तुत की

प्रकाशित: 23 सित॰ 2026

अप्रैल 2022अप्रैल 2025

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कक्षा 12 इतिहास: 'मुगल दरबार' अध्याय

2023-24 सत्र से पहले

'Themes of Indian History – Part II' में पूर्ण अध्याय के रूप में शामिल

2023-24 सत्र से

अध्याय पूरी तरह हटाया गया

कक्षा 6-12 पाठ्यक्रम सामग्री (2022 युक्तिसंगतीकरण)

2022 युक्तिसंगतीकरण से पहले

पूर्ण पूर्व-2022 पाठ्यक्रम (सभी विषय)

2022 युक्तिसंगतीकरण के बाद

लगभग 30% सामग्री हटाई गई (सभी विषयों में)

दिल्ली सल्तनत/मुगल काल किस कक्षा में पहली बार पढ़ाया जाता है

2025-26 सत्र से पहले

कक्षा 7

2025-26 सत्र से

कक्षा 8

NCERT ने 2023 में कक्षा 12 से मुगल दरबार पर अध्याय हटाया, 2025 में दिल्ली सल्तनत/मुगल काल को कक्षा 7 से कक्षा 8 में भेजा, और सल्तनत-मुगल दौर की हिंसा पर स्पष्ट रूप से "कठिन दौर" शीर्षक वाला एक नया खंड जोड़ा — साथ ही कक्षा 7 में प्राचीन इतिहास (गुप्त, मौर्य) का दायरा भी बढ़ाया। NCERT इसे महामारी-कालीन बोझ घटाने और "भारतीय ज्ञान परंपरा" में जड़ें मजबूत करने का कदम बताता है; इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस और 200 से अधिक इतिहासकार इस प्रक्रिया को राजनीतिक और गैर-सलाहकारी बताते हैं। न तो "पूर्ण रूप से मिटाने" का लोकप्रिय दावा और न ही NCERT का "कुछ नहीं हटाया गया" वाला रुख तथ्यों पर पूरी तरह टिकता है — सामग्री का बड़ा हिस्सा हटाया नहीं गया बल्कि एक कक्षा आगे खिसका और नई, अधिक आलोचनात्मक भाषा में फिर से लिखा गया, जबकि कक्षा 12 से एक पूरा अध्याय वाकई हटाया गया।

तीन चरणों में बदलाव, 2022-2025

पहला चरण 2022 में आया, जब NCERT ने कक्षा 6 से 12 तक सभी विषयों में करीब 30% पाठ्यक्रम सामग्री हटाई — इसकी आधिकारिक वजह कोविड-19 के कारण छात्रों पर पड़ा शैक्षणिक बोझ बताई गई (NCERT का अपना दस्तावेज़, "Rationalisation of Textbooks During the Pandemic", ncert.nic.in)। इतिहास इसमें अकेला विषय नहीं था — विज्ञान, गणित और नागरिकशास्त्र की सामग्री भी इसी दौर में घटाई गई। दूसरा चरण अप्रैल 2023 में आया, जब कक्षा 12 की पुस्तक "Themes of Indian History – Part II" से "Kings and Chronicles: The Mughal Courts (16वीं-17वीं सदी)" नामक पूरा अध्याय हटा दिया गया। तीसरा और सबसे बड़ा ढांचागत बदलाव 2025-26 शैक्षणिक सत्र में आया: कक्षा 7 की नई एकीकृत पुस्तक "Exploring Society: India and Beyond, Part 1" अब गुप्त काल पर समाप्त होती है, जिसमें आर्यभट्ट के पृथ्वी-घूर्णन और पाई (π) से जुड़े गणनाओं को गुप्त-कालीन वैज्ञानिक उपलब्धि के रूप में और चंद्रगुप्त द्वितीय जैसे शासकों के अधीन राजनीतिक स्थिरता से जोड़कर पढ़ाया जाता है; मौर्य साम्राज्य और अशोक के शासन का विवरण भी बढ़ाया गया है, साथ ही शुंग, सातवाहन, चोल, पांड्य और चेर राजवंशों को भी शामिल किया गया है। दिल्ली सल्तनत और मुगल काल, जो पहले कक्षा 7 में पढ़ाए जाते थे, अब नई कक्षा 8 की पुस्तक "Exploring Society: Indian and Beyond" में पहली बार उस स्तर पर पढ़ाए जाते हैं — जिसमें "A Note on Some Darker Periods in History" नामक एक समर्पित खंड है, जो बाबर को "क्रूर और निर्मम विजेता", अकबर के शासन को "क्रूरता और सहिष्णुता का मिश्रण" बताता है, और औरंगज़ेब द्वारा मंदिरों-गुरुद्वारों को नष्ट किए जाने का उल्लेख करता है।

NCERT का आधिकारिक तर्क बनाम इतिहासकारों की दर्ज आपत्तियां

NCERT की आधिकारिक स्थिति — जो उसके 2022 के युक्तिसंगतीकरण दस्तावेज़ में दर्ज है और निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी द्वारा बार-बार दोहराई गई है — यह है कि बदलावों का मकसद शैक्षणिक बोझ और विषयों के बीच दोहराव घटाना है, और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 से जुड़े 2024-25 के पाठ्यक्रम में "भारतीय ज्ञान परंपरा" (Indian Knowledge Systems) को एकीकृत कर छात्रों में सकलानी के शब्दों में "जड़ें" (rootedness) मजबूत करना भी एक उद्देश्य है। मुगल-कालीन पुनर्लेखन पर NCERT का दर्ज रुख यह है (सकलानी की मीडिया को दी गई टिप्पणी के अनुसार) कि "हम अकबर या औरंगज़ेब को दानव नहीं बना रहे, लेकिन यह दिखाना ज़रूरी है कि इन शासकों की भी सीमाएं थीं और उन्होंने क्रूर कृत्य भी किए" — यानी NCERT नई "कठिन दौर" वाली भाषा को मिटाने के बजाय आलोचनात्मक पूर्णता जोड़ने के रूप में पेश करता है। इसके विपरीत, भारत के सबसे बड़े पेशेवर इतिहासकार संगठन इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस (IHC) का रुख अलग है। जुलाई 2021 के एक पत्र में, जो आने वाले बदलावों से पहले लिखा गया था, IHC ने कहा कि यह सुधार-प्रक्रिया "किसी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता-प्राप्त इतिहासकारों की विशेषज्ञ संस्था से नहीं बल्कि पूर्वाग्रह के गैर-शैक्षणिक पक्षधरों की राजनीतिक स्थिति से उपज रही है।" अप्रैल 2023 में, भारतीय और विदेशी विश्वविद्यालयों (जिनमें JNU और दिल्ली विश्वविद्यालय शामिल हैं) के 200 से अधिक इतिहासकारों और विद्वानों ने एक संयुक्त बयान जारी कर विशेष रूप से कक्षा 12 से मुगल अध्याय हटाए जाने पर आपत्ति जताई, यह कहते हुए कि NCERT ने मूल पाठ्यपुस्तक-लेखन टीम से सलाह नहीं ली और प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी। यह एक ऐसा विवादित प्रश्न है जिसे यह साइट की उद्धरण-आधारित पद्धति निर्णायक रूप से हल नहीं कर सकती — कि क्या ये बदलाव वैध पाठ्यक्रम-सरलीकरण हैं या किसी ऐतिहासिक काल की राजनीति-प्रेरित प्रस्तुति। हम दोनों पक्षों को उनके अपने शब्दों में उद्धृत कर रहे हैं, किसी एक का समर्थन या खंडन किए बिना।

एक वास्तविक छात्र के लिए इसका मतलब — और दोनों पक्षों के दावों की सीमाएं

व्यावहारिक स्तर पर: 2025-26 सत्र में कक्षा 8 का छात्र दिल्ली सल्तनत और मुगल काल के बारे में अपने उस बड़े भाई-बहन से एक पूरी कक्षा देर से पढ़ता है जिसने 2025 से पहले यह विषय कक्षा 7 में पढ़ा था, और अब वह एक ऐसी पाठ्यपुस्तक पढ़ता है जो एक समर्पित खंड में हिंसा और धार्मिक असहिष्णुता को स्पष्ट रूप से रेखांकित करती है — यह एक ऐसी प्रस्तुति-शैली है जो 2023 से पहले की पाठ्यपुस्तकों में नहीं थी, और जिसे अब हर अभिभावक और शिक्षक को कक्षा में सीधे संभालना पड़ता है, चाहे वे इसकी मंशा को जैसे भी देखें। ईमानदारी से देखा जाए तो: यह लोकप्रिय दावा कि मुगल इतिहास को NCERT की किताबों से "हटा" दिया गया है, पूरी तरह सटीक नहीं है — अधिकांश सामग्री हटाई नहीं गई बल्कि एक कक्षा आगे खिसकी और अधिक आलोचनात्मक भाषा में फिर से लिखी गई; वहीं NCERT निदेशक सकलानी का यह सार्वजनिक दावा कि "कुछ भी नहीं हटाया गया" भी पूरी तरह सटीक नहीं है, क्योंकि कक्षा 12 से एक पूरा अध्याय वाकई हटाया गया, यह कई स्वतंत्र स्रोतों से पुष्टि किया गया तथ्य है। कई माध्यमों में जांचा गया वास्तविक चित्र "मिटाने" के दावे से संकीर्ण है, पर "कोई बदलाव नहीं" के दावे से कहीं अधिक वास्तविक है: कक्षा 12 में विशिष्ट अध्याय काटे गए, कक्षा 7-8 में विशिष्ट सामग्री स्थानांतरित और पुनर्प्रस्तुत की गई, और साथ ही प्राचीन काल (गुप्त, मौर्य) का दायरा घटाया नहीं बल्कि बढ़ाया गया। यह एक घरेलू पाठ्यक्रम-निर्माण का मसला है, भारत की क्षमता या स्वायत्तता से जुड़ा वैश्विक प्रश्न नहीं, इसलिए हम यहां कोई कृत्रिम "व्यापक" (macro) दृष्टिकोण नहीं जोड़ रहे।

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