प्याज़ और टमाटर की कीमतें अब भी उपभोक्ता को झकझोरने वाले उछाल से किसान को तबाह करने वाली गिरावट के बीच झूलती हैं
प्रकाशित: 16 सित॰ 2026
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टमाटर की खुदरा कीमत, दिल्ली-एनसीआर (वार्षिक उछाल)
प्याज़ की कीमत — खुले बाज़ार में गिरावट बनाम सरकारी खरीद, महाराष्ट्र
जो सब्ज़ियां कभी ₹80-100 प्रति किलो तक उछलकर घर का बजट बिगाड़ देती हैं, वही कुछ महीनों बाद ₹4-6 प्रति किलो तक गिरकर किसान का पूरा सीज़न बर्बाद कर सकती हैं — यह दोनों ही इस पूरे दौर में होता रहा है, और सरकार की प्रतिक्रिया ज़्यादातर तात्कालिक रही है, ढांचागत नहीं।
सिर्फ़ 2025 में ही दो बार उछाल
2025 में दिल्ली-एनसीआर में टमाटर की कीमतें कुछ ही महीनों में दो बार उछलीं। अगस्त में, उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत में भारी बारिश ने आपूर्ति बिगाड़ दी और महीने के अंत तक टमाटर की कीमत लगभग ₹85 प्रति किलो पहुंच गई, जिसके बाद उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (NCCF) ने दिल्ली में मोबाइल वैन और चार स्थायी काउंटरों के ज़रिए ₹47-60 प्रति किलो पर टमाटर बेचना शुरू किया — एक छोटी सी राहत, जिसमें कुल मिलाकर सिर्फ़ 27,000 किलो से कुछ ज़्यादा बिका, जो 3 करोड़ से ज़्यादा आबादी वाले शहर की रोज़ की खपत के सामने बहुत छोटा हिस्सा है। नवंबर में, चक्रवात मोंथा ने आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में टमाटर की फ़सल को नुकसान पहुंचाया — ये दोनों राज्य मिलकर भारत के कुल टमाटर उत्पादन का लगभग 26% हिस्सा देते हैं — जिससे कीमतें ₹80 प्रति किलो तक पहुंच गईं, यानी एक साल पहले इसी महीने के मुक़ाबले 66.7% ज़्यादा, और 2024-25 के लिए देश का कुल टमाटर उत्पादन 21.32 मिलियन टन से घटकर 19.46 मिलियन टन रहने का अनुमान लगाया गया। सरकार ने फिर से सब्सिडी वाले 'जनता' टमाटर बेचे, इस बार ₹52 प्रति किलो पर, और कहा कि पूरी राहत तब मिलेगी जब बाज़ार की कीमतें अपने आप ₹40-50 प्रति किलो तक नरम होंगी।
दूसरा पहलू: वह गिरावट जो किसान को तबाह कर देती है
यही अस्थिरता प्याज़ उगाने वालों के लिए उल्टी दिशा में मार करती है। मई 2026 में, महाराष्ट्र के नासिक क्षेत्र — जो देश की सबसे बड़ी प्याज़ उत्पादक पट्टी है — में प्याज़ की कीमतें खुले बाज़ार में गिरकर सिर्फ़ ₹4-6 प्रति किलो रह गईं, जो खेती, ढुलाई या क़र्ज़ चुकाने की लागत भी नहीं निकालती। किसानों ने सरकार से ₹32 प्रति किलो पर खरीद की मांग की; सरकार ने अपना प्रस्ताव सिर्फ़ ₹10 से बढ़ाकर ₹15 प्रति किलो किया, जिसे किसानों ने अपर्याप्त बताकर ठुकरा दिया। नतीजा नासिक और छत्रपति संभाजीनगर ज़िलों में राजमार्ग जाम और बड़े प्रदर्शनों के रूप में सामने आया, जिनमें किसानों ने प्याज़ की मालाएं पहनकर विरोध जताया। किसान परिवार के लिए यह सिर्फ़ एक आंकड़ा नहीं है — यह सीज़न का क़र्ज़ चुका पाने और डिफ़ॉल्ट होने के बीच का फ़र्क़ है।
ईमानदार टिप्पणी — तात्कालिक राहत, समाधान नहीं
यहां बताया गया हर हस्तक्षेप — सब्सिडी वाली वैन, आपातकालीन खरीद-मूल्य में बढ़ोतरी, या पिछले संकटों में इस्तेमाल किए गए निर्यात प्रतिबंध — समस्या के दिखने के बाद उसके लक्षण का इलाज करता है, जड़ का नहीं: भारत की प्याज़ और टमाटर की आपूर्ति श्रृंखला आज भी एक खराब मानसून, चक्रवात या बंपर फ़सल जैसे किसी एक झटके के आगे बहुत कमज़ोर है, क्योंकि भंडारण, कीमत के पूर्वानुमान और प्रसंस्करण क्षमता उत्पादन की रफ़्तार से तालमेल नहीं बिठा पाई। यह समस्या 2014 से नई नहीं है, और इस दौरान भी हल नहीं हुई — वही उछाल-गिरावट का चक्र जिसने अगस्त और नवंबर 2025 में उपभोक्ताओं को परेशान किया, उसी ने कुछ ही महीने बाद, मई 2026 में, एक ही फ़सल-चक्र के भीतर, किसानों को तबाह कर दिया। यह साइट किसी भी सरकारी हस्तक्षेप को इस बात के सबूत के तौर पर पेश नहीं कर रही कि मूल समस्या हल हो चुकी है।
स्रोत
- Tomato Prices Spike To ₹80 Per Kg, Can Government's Subsidy Vans Bring Relief?The Free Press JournalReputable media
- Centre Launches Subsidised Tomato Sale In Delhi At ₹47–₹60/Kg To Tackle Rain-Driven Price SpikeThe Free Press JournalReputable media
- Onion Price Crash Triggers Maharashtra Farmer Protests, Demand For Rs 32/kg ProcurementOutlook IndiaReputable media
आख़िरी बार सत्यापित: 16 सित॰ 2026
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