2020 तक पेट्रोल-डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी तीन गुना हुई, फिर 2026 में घटाई गई — लेकिन पंप की कीमतें उतनी नहीं गिरीं
प्रकाशित: 16 सित॰ 2026
पहले बनाम अभी
पेट्रोल पर केंद्रीय एक्साइज़ ड्यूटी
पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त एक्साइज़ ड्यूटी (2026 का कच्चा तेल-झटका राहत)
2014 से 2020 के बीच एक लीटर पेट्रोल पर लगने वाला टैक्स तीन गुने से भी ज़्यादा हो गया; और जब सरकार ने आख़िरकार 2026 में इसे बड़े पैमाने पर घटाया, तो वह बचत तेल कंपनियों के पास गई, आपके पंप पर चुकाई जाने वाली कीमत में नहीं दिखी।
वह टैक्स जो कच्चे तेल के उतार-चढ़ाव के बावजूद तीन गुना हो गया
2014 में जब मौजूदा सरकार सत्ता में आई, तब पेट्रोल पर केंद्रीय एक्साइज़ ड्यूटी ₹9.48 प्रति लीटर और डीज़ल पर ₹3.56 प्रति लीटर थी। अगले छह वर्षों में इस ड्यूटी को बार-बार बढ़ाया गया, और मई 2020 तक यह पेट्रोल पर रिकॉर्ड ₹32.98 प्रति लीटर और डीज़ल पर ₹31.83 प्रति लीटर तक पहुंच गई — यानी पेट्रोल पर तीन गुने से भी ज़्यादा की बढ़ोतरी — जैसा कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री रामेश्वर तेली ने संसद में एक लिखित जवाब में पुष्टि की। एक्साइज़ ड्यूटी एक केंद्रीय टैक्स है जो रिफ़ाइनरी की कीमत और डीलर के मार्जिन के ऊपर जुड़ता है, और उसके बाद राज्य का VAT भी जुड़ता है — यानी यह उपभोक्ता की कुल कीमत का सिर्फ़ एक हिस्सा है, लेकिन एक बड़ा और काफ़ी हद तक तय हिस्सा, चाहे किसी भी दिन कच्चे तेल की अपनी कीमत जो भी हो।
पंप पर इसका असल मतलब क्या है
एक आम यात्री या डिलीवरी वाहन चलाने वाले छोटे कारोबारी के लिए, यह टैक्स कोई अलग लाइन-आइटम नहीं दिखता — यह हर बार टंकी भरवाते समय चुकाई जाने वाली पंप कीमत में ही समाया होता है। 2026 के मध्य तक, दिल्ली में पेट्रोल लगभग ₹102 प्रति लीटर पर बिक रहा था। चूंकि एक्साइज़ ड्यूटी एक तय रुपये की रकम है, प्रतिशत नहीं, इसलिए इसका बोझ रोज़ की खबरों के साथ नहीं बदलता — यह उस हफ़्ते कच्चे तेल की कीमत चाहे जो भी हो, वही रहता है, और यही एक वजह है कि यह उन वर्षों में भी सरकार की एक बड़ी और स्थिर आय का ज़रिया बना रहा जब कच्चे तेल की कीमतें खुद बिल्कुल स्थिर नहीं थीं।
2026: कच्चे तेल का झटका, और वह कटौती जो रिफ़ाइनरी गेट पर ही रुक गई
मार्च 2026 में, पश्चिम एशिया में तनाव के चलते होर्मुज़ जलडमरूमध्य से टैंकरों की आवाजाही बाधित होने से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें लगभग 50% बढ़ीं और $100 प्रति बैरल के पार चली गईं। पूरा असर सीधे उपभोक्ताओं पर डालने के बजाय, सरकार ने पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त एक्साइज़ ड्यूटी ₹13 से घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दी और डीज़ल पर ₹10 से घटाकर शून्य — यानी ₹10 प्रति लीटर की कटौती — और आगे के झटकों पर तेज़ी से प्रतिक्रिया देने के लिए हर पखवाड़े समीक्षा की व्यवस्था भी शुरू की। इस कटौती से दो हफ़्तों में राजस्व पर करीब ₹7,000 करोड़ का असर पड़ने का अनुमान लगाया गया, और बाद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इन राहत उपायों से कुल मिलाकर लगभग ₹1 लाख करोड़ के व्यापक राजस्व असर का ज़िक्र किया। ईमानदार टिप्पणी यह है कि ड्यूटी घटने पर पेट्रोल-डीज़ल की खुदरा कीमतें नहीं घटाई गईं। यह राहत सरकारी तेल विपणन कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) को कच्चे तेल के उछाल से हो रहे घाटे की भरपाई के लिए इस्तेमाल हुई — न कि उस उपभोक्ता तक सस्ती पंप कीमत के तौर पर पहुंची, जिसके लिए यह टैक्स कटौती घोषित की गई थी।
स्रोत
- Excise duty on petrol, diesel reduced as crude prices riseAutocar IndiaReputable media
- Fuel price review every 15 days, excise duty reduced to shield consumers from global crude shockBusiness TodayReputable media
- Excise Duty On Petrol Was Rs 9.48/ltr, Diesel Rs 3.56 In 2014: Rameswar TeliBusinessworldSecondary source
आख़िरी बार सत्यापित: 16 सित॰ 2026
इस जानकारी में कोई गलती दिखे तो बताएंचर्चा
चर्चा में शामिल होने के लिए Google से साइन इन करें।
अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। अपनी राय साझा करने वाले पहले व्यक्ति बनें।