मोदी ने किया क्या है?
प्रत्यक्ष प्रभाव

UPI बना दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट प्लेटफ़ॉर्म

प्रकाशित: 14 सित॰ 2026

अप्रैल 2016मई 2026

पहले बनाम अभी

UPI का वार्षिक लेनदेन मूल्य

लॉन्च से पहले (अप्रैल 2016 से पूर्व)

अस्तित्व में नहीं था

वित्त वर्ष 2025-26

₹314 लाख करोड़/वर्ष

एक दशक से भी कम समय में, UPI ने मोबाइल नंबर को नकद, कार्ड और ज़्यादातर बैंक ट्रांसफर का पूरा विकल्प बना दिया।

यह काम कैसे करता है

अप्रैल 2016 में NPCI द्वारा लॉन्च किए गए UPI (Unified Payments Interface) ने लोगों को सिर्फ मोबाइल नंबर या QR कोड से तुरंत पैसे भेजने और पाने की सुविधा दी — बैंक डिटेल्स की ज़रूरत नहीं।

आज का स्तर

दस साल में UPI भारत की रोज़मर्रा की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुका है: अकेले वित्त वर्ष 2025-26 में 24,161.69 करोड़ लेनदेन में ₹314 लाख करोड़ का लेन-देन हुआ, जो पिछले साल से 32.5% ज़्यादा है। अगस्त 2025 में पहली बार मासिक लेनदेन 2,000 करोड़ को पार कर गया, और मई 2026 में एक ही महीने में ₹29.90 लाख करोड़ का रिकॉर्ड बना। अक्टूबर 2025 में मासिक लेनदेन मूल्य ने उस समय का रिकॉर्ड ₹27.28 लाख करोड़ छुआ।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

सरकार के अनुसार, इस स्तर ने UPI को दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट प्लेटफ़ॉर्म बना दिया है — जो सड़क किनारे के विक्रेता को भुगतान से लेकर बड़े B2B बिल तक सब कुछ संभालता है।

फिनटेकडिजिटल भुगतानUPI

स्रोत

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आख़िरी बार सत्यापित: 16 सित॰ 2026

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