भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन इस समूह में सबसे कम — पर यह उपलब्धि से ज़्यादा कम खपत की कहानी है
CO2 उत्सर्जन प्रति व्यक्ति (LULUCF को छोड़कर), 2023
अमेरिका
13.71 टन CO2e प्रति व्यक्ति
रूस
13.55 टन CO2e प्रति व्यक्ति
चीन
9.23 टन CO2e प्रति व्यक्ति
दक्षिण अफ्रीका
6.76 टन CO2e प्रति व्यक्ति
ब्रिटेन
4.45 टन CO2e प्रति व्यक्ति
ब्राज़ील
2.27 टन CO2e प्रति व्यक्ति
भारत
2.10 टन CO2e प्रति व्यक्ति
विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 2023 में भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन इस समूह में सबसे कम था — लगभग 2.10 टन CO2e प्रति व्यक्ति, जो अमेरिका (13.71 टन) और रूस (13.55 टन) के छठे हिस्से से भी कम और चीन (9.23 टन) के चौथाई से भी कम है। ब्राज़ील (2.27 टन) भारत के सबसे करीब है, जबकि ब्रिटेन (4.45 टन) और दक्षिण अफ्रीका (6.76 टन) बीच में आते हैं। लेकिन इसे शुद्ध पर्यावरणीय उपलब्धि मानना ईमानदार नहीं होगा: यह आंकड़ा मुख्यतः भारत के अब भी कम औसत ऊर्जा खपत और आय स्तर को दिखाता है, न कि किसी कहीं ज़्यादा स्वच्छ ऊर्जा प्रणाली को — इसी साइट की एक अन्य तुलना दिखाती है कि नवीकरणीय ऊर्जा से बिजली उत्पादन की हिस्सेदारी में भारत छह देशों के समूह में सबसे नीचे है। एक सामान्य भारतीय परिवार के लिए कम प्रति व्यक्ति उत्सर्जन का मतलब अक्सर कम बिजली खपत, सीमित एयर-कंडीशनिंग या गाड़ी का सीमित इस्तेमाल भी है — यानी यह आंकड़ा जितना पर्यावरणीय संयम की कहानी है, उतना ही ऊर्जा तक सीमित पहुंच की भी। वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति ज़्यादा जटिल है: अपनी विशाल आबादी की वजह से भारत कुल उत्सर्जन में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्सर्जक है, भले ही प्रति व्यक्ति आंकड़ा सबसे कम हो — और अर्थव्यवस्था तथा बिजली की मांग बढ़ने के साथ यह प्रति व्यक्ति आंकड़ा भी बढ़ने की राह पर है। यही अंतर — कम प्रति व्यक्ति पर ऊंचा कुल उत्सर्जन — जलवायु वार्ताओं में भारत को 'ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी' और 'समान प्रति व्यक्ति हिस्सेदारी' के तर्क पर खड़े होने की गुंजाइश देता है, जो उसे बातचीत की मेज़ पर एक वास्तविक स्थिति देता है।
स्रोत
- Carbon dioxide (CO2) emissions excluding LULUCF per capita (t CO2e/capita) — World Development IndicatorsWorld BankOfficial / primary source