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तुलना

अनुसंधान एवं विकास पर खर्च (GDP का %): भारत 0.65% पर, चीन से बहुत पीछे और 2008 से नीचे

अनुसंधान एवं विकास पर कुल खर्च (GDP का %)

दक्षिण कोरिया
4.94% (2023) % GDP
अमेरिका
3.45% (2023) % GDP
जर्मनी
3.15% (2023) % GDP
चीन
2.58% (2023) % GDP
ब्राज़ील
1.19% (2023) % GDP
थाईलैंड
0.94% (2023) % GDP
भारत
0.65% (2020) % GDP
वियतनाम
0.41% (2023) % GDP
इंडोनेशिया
0.28% (2020) % GDP
पाकिस्तान
0.16% (2023) % GDP
विश्व बैंक के विश्व विकास संकेतकों (जिनमें UNESCO के आँकड़े शामिल हैं) के अनुसार भारत अपने GDP का 0.65% (2020, भारत के लिए उपलब्ध सबसे ताज़ा वर्ष) अनुसंधान एवं विकास पर खर्च करता है। तुलना के लिए चुने गए साथियों में यह दक्षिण कोरिया (4.94%, 2023), अमेरिका (3.45%), जर्मनी (3.15%) और चीन (2.58%) से बहुत कम है, ब्राज़ील (1.19%) और थाईलैंड (0.94%) से भी कम, पर वियतनाम (0.41%), इंडोनेशिया (0.28%, 2020) और पाकिस्तान (0.16%) से अधिक। इज़राइल व्यापक सूची में सबसे ऊपर (6.35%) है। एक चेतावनी: भारत के आँकड़े का वर्ष (2020) अधिकांश साथियों (2023) से अलग है, इसलिए तुलना पूरी तरह एक ही वर्ष की नहीं है। प्रवृत्ति भी ध्यान देने योग्य है: विश्व बैंक की श्रृंखला में भारत का हिस्सा 2008 के 0.86% से घटकर 2020 में 0.65% रह गया, यानी GDP के अनुपात में R&D खर्च घटा, जबकि अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ी (यह अनुपात है, पूर्ण रकम के बारे में दावा नहीं)। शोधकर्ताओं की संख्या में भी अंतर है: 2020 में प्रति दस लाख आबादी पर भारत में लगभग 259 शोधकर्ता, चीन में लगभग 1,600 और दक्षिण कोरिया में लगभग 8,620 थे। आम व्यक्ति के लिए इसका संबंध अप्रत्यक्ष पर वास्तविक है: कम R&D का अर्थ अक्सर नए उत्पादों, दवाओं और तकनीक के लिए आयातित ज्ञान पर अधिक निर्भरता और उच्च-कौशल अनुसंधान नौकरियों की कम संख्या हो सकता है। राष्ट्रीय स्तर पर यह आत्मनिर्भरता का प्रश्न है: चिप और अंतरिक्ष जैसी इस साइट की प्रविष्टियों में दिखती महत्वाकांक्षा तभी टिकेगी जब अनुसंधान में निवेश भी बढ़े। यह तुलना सरकारी बनाम निजी खर्च का बँटवारा नहीं दिखाती, और R&D खर्च की मात्रा अनुसंधान की गुणवत्ता का माप नहीं है।
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