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तुलना

पाँच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर: भारत में प्रति 1,000 जन्म पर 26.6, 2014 से 43% कम — बांग्लादेश और पाकिस्तान से बेहतर, चीन से बहुत पीछे

पाँच वर्ष से कम आयु की मृत्यु दर, 2024 (प्रति 1,000 जीवित जन्म पर मृत्यु; कम बेहतर है)

पाकिस्तान
56.0 प्रति 1,000 जीवित जन्म
बांग्लादेश
30.5 प्रति 1,000 जीवित जन्म
भारत
26.6 प्रति 1,000 जीवित जन्म
इंडोनेशिया
17.7 प्रति 1,000 जीवित जन्म
वियतनाम
17.3 प्रति 1,000 जीवित जन्म
ब्राज़ील
14.2 प्रति 1,000 जीवित जन्म
अमेरिका
6.5 प्रति 1,000 जीवित जन्म
चीन
5.7 प्रति 1,000 जीवित जन्म
जर्मनी
3.7 प्रति 1,000 जीवित जन्म
संयुक्त राष्ट्र के अनुमान (UN Inter-agency Group for Child Mortality Estimation, जो विश्व बैंक के माध्यम से प्रकाशित होते हैं) के अनुसार 2024 में भारत में पाँच वर्ष से कम आयु की मृत्यु दर प्रति 1,000 जीवित जन्म पर 26.6 थी — यानी लगभग हर 38 में से एक बच्चा अपना पाँचवाँ जन्मदिन नहीं देख पाता। यह 2014 के 46.4 से करीब 43% और 2000 के 91.8 से काफ़ी नीचे है। साथी देशों में जर्मनी (3.7), चीन (5.7), अमेरिका (6.5), ब्राज़ील (14.2), वियतनाम (17.3) और इंडोनेशिया (17.7) भारत से कम हैं, जबकि बांग्लादेश (30.5) और पाकिस्तान (56.0) ज़्यादा। प्रतिशत के लिहाज़ से 2014 के बाद भारत की गिरावट बांग्लादेश (40.5 से 30.5, लगभग 25%) और पाकिस्तान (77.2 से 56.0, लगभग 27%) से तेज़ है, लेकिन चीन बहुत नीचे के स्तर से शुरू करके भी 11.6 से 5.7 पर आ गया (लगभग 51% की गिरावट), इसलिए भारत अब भी चीन से प्रति 1,000 जन्म पर लगभग 21 मौतों की दूरी पर है। सूक्ष्म स्तर पर: गाँव या शहरी बस्ती के किसी परिवार के लिए 26.6 और 5.7 के बीच का फ़र्क यही है कि बच्चे को खो देना एक जानी-पहचानी, वास्तविक आशंका है या दुर्लभ घटना; राष्ट्रीय दर का हर अंक अनगिनत असली परिवारों का प्रतिनिधित्व करता है, और ये मौतें अक्सर ऐसे कारणों से होती हैं जिन्हें स्वास्थ्य व्यवस्था काफ़ी हद तक रोक या ठीक कर सकती है। व्यापक स्तर पर: यह राष्ट्रीय औसत है और राज्यों के बीच तथा अमीर-गरीब परिवारों के बीच के बड़े अंतर को छिपा लेता है, जो इस डेटा में दिखाई नहीं देते। यह तुलना गिरावट का श्रेय किसी एक योजना या सरकार को भी नहीं देती, क्योंकि बच्चों का जीवित रहना आय, स्वच्छता, पोषण, टीकाकरण और इलाज तक पहुँच — सब पर एक साथ निर्भर है। यह जो दिखाती है वह है: लगातार सुधार, दोनों दक्षिण एशियाई पड़ोसियों से आगे की स्थिति, और पूर्वी एशिया के स्तर तक पहुँचने के लिए अभी लंबा रास्ता।
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