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सबके लिए उड़ान: UDAN ने नक्शा बड़ा किया, पर आधे रूट टिक नहीं पाए
प्रकाशित: 1 अक्टू॰ 2026
इस पर एक संपादकीय राय: UDAN: हवाई अड्डे 74 से 160 हुए, पर लगभग आधे रूट सब्सिडी के बाद बंद हो गए
कई दशकों तक हवाई यात्रा का अर्थ था एक दुर्लभ विशेषाधिकार: कुछ बड़े शहर, गिने-चुने रूट, और बाकी देश के लिए लंबी सड़क या रेल यात्रा। छोटे शहर के किसी परिवार के लिए बड़े शहर के अस्पताल तक पहुँचना सड़क पर पूरे दिन का सफ़र हो सकता था। UDAN ने 2016 से यही दूरी मिटाने का वादा किया, और आँकड़े बताते हैं कि कुछ किया भी गया: PIB के अनुसार 25 मार्च 2026 तक 95 हवाई अड्डों, हेलीपोर्टों और जल-एयरोड्रोम पर 663 रूट चालू हुए और 163 लाख से अधिक यात्रियों ने उड़ान भरी। मंत्री के अनुसार चालू हवाई अड्डे 2014 के 74 से बढ़कर 160 हुए।
पर इस कहानी का दूसरा आधा उतना ही ज़रूरी है। जुलाई 2026 तक चालू हुए 679 रूटों में से केवल 348 अब चल रहे हैं। जिन शहरों में उड़ान आई और फिर चली गई, वहाँ लोग सड़क-रेल पर लौटे; इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार बीदर और कलबुर्गी इसका उदाहरण हैं। वृहद स्तर पर, 163 लाख यात्राएँ लगभग 146 करोड़ की आबादी पर हर 90 लोगों पर एक यात्रा बैठती हैं: दिशा सही, पर पैमाना अभी छोटा।
मार्च 2026 की संशोधित UDAN ₹28,840 करोड़ के साथ वही कमज़ोरी पकड़ने की कोशिश है: सब्सिडी तीन की जगह पाँच साल, और हवाई अड्डों के रखरखाव में मदद। यह सही सवाल का जवाब ज़रूर है, पर सवाल का उत्तर अभी आना बाकी है: क्या उड़ानें सब्सिडी के बिना भी टिकेंगी? अभी का हिसाब मिला-जुला है।
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