FDI ऊपरी तौर पर रिकॉर्ड पर, लेकिन नेट निवेश लगभग गायब हो गया
प्रकाशित: 15 सित॰ 2026
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सकल FDI निवेश (कुल)
नेट FDI (रिपैट्रिएशन व विदेश-निवेश के बाद)
मैन्युफैक्चरिंग में FDI इक्विटी
वित्त वर्ष 2023-24
$16.12 अरब
वित्त वर्ष 2024-25
$19.04 अरब (+18%)
हेडलाइन आंकड़ा शानदार दिखता है; लेकिन जो आंकड़ा असल में यह बताता है कि विदेशी पूंजी भारत में टिक रही है या नहीं, वह कहीं ज़्यादा मिली-जुली कहानी बताता है।
हेडलाइन आंकड़ा: सकल FDI रिकॉर्ड पर
भारत में सकल FDI — यानी आने वाला कुल विदेशी पैसा, जो बाद में बाहर जाने वाली राशि घटाने से पहले का आंकड़ा है — FY2013-14 के लगभग $36.05 अरब से बढ़कर FY2023-24 में $71.28 अरब हो गया, फिर 14% बढ़कर FY2024-25 में रिकॉर्ड $81.04 अरब और DPIIT के आंकड़ों के अनुसार FY2025-26 में अनुमानित $94.53 अरब (17% की और बढ़त) तक पहुंच गया। सेवा क्षेत्र (FY2024-25 के कुल निवेश का 19%), कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर (16%), और ट्रेडिंग (8%) में सबसे ज़्यादा निवेश आया; सिर्फ़ मैन्युफैक्चरिंग में FDI इक्विटी 18% बढ़कर $19.04 अरब हो गई। सिंगापुर, मॉरीशस और अमेरिका सबसे बड़े स्रोत देश बने रहे, और स्रोत देशों की संख्या FY2013-14 के 89 से बढ़कर FY2024-25 में 112 हो गई। लेकिन यह बढ़त एक सीधी रेखा में नहीं हुई: DPIIT के अपने साल-दर-साल आंकड़े दिखाते हैं कि FDI वास्तव में FY2021-22 (-3%) और FY2022-23 (-13%) में घटा, और FY2023-24 में सपाट रहा, इस हाल की तेज़ी से पहले।
ईमानदार आंकड़ा: नेट FDI लगभग गायब हो गया
सकल निवेश तो सिर्फ़ आधी तस्वीर है। RBI के आंकड़े बताते हैं कि नेट FDI — यानी सकल निवेश में से विदेशी निवेशकों द्वारा वापस निकाली गई राशि (रिपैट्रिएशन और डिसइन्वेस्टमेंट) और भारतीय कंपनियों के विदेश में किए गए निवेश को घटाने के बाद बचा हिस्सा — FY2023-24 के $10.1 अरब से घटकर FY2024-25 में सिर्फ़ $0.4 अरब (ठीक-ठीक $353 मिलियन) रह गया, यानी लगभग 96% की गिरावट। इसका कारण यह रहा कि विदेशी निवेशकों द्वारा रिपैट्रिएशन/डिसइन्वेस्टमेंट एक दशक के उच्चतम स्तर $51.5 अरब पर पहुंच गया (पिछले साल के $44.5 अरब से ज़्यादा), जबकि भारतीय कंपनियों का विदेश में निवेश 75% बढ़कर $29.2 अरब हो गया। RBI ने खुद मई 2025 के अपने बुलेटिन में इसे चेतावनी की बजाय 'एक परिपक्व बाज़ार का संकेत, जहां विदेशी निवेशक आसानी से आ-जा सकते हैं' बताया — लेकिन इस व्याख्या पर सार्वजनिक रूप से सवाल भी उठे हैं, क्योंकि जिस बाज़ार में आने और जाने वाली पूंजी लगभग बराबर हो जाए, वहां ज़रूरी नहीं कि कोई नई उत्पादक विदेशी पूंजी असल में जमा हो रही हो। एक आंशिक राहत भी है: बाद के आंकड़ों के अनुसार नेट FDI में कुछ सुधार हुआ है, और FY2025-26 के लिए यह लगभग $7.65 अरब तक पहुंच गया।
सामान्य भारतीयों के लिए इसका मतलब
FDI का सबसे स्पष्ट रोज़मर्रा असर नौकरियों और प्रतिस्पर्धा के ज़रिए दिखता है: किसी विदेशी-वित्तपोषित इलेक्ट्रॉनिक्स या ऑटो-कंपोनेंट फैक्ट्री का मतलब है औपचारिक क्षेत्र की नौकरियां, जो अक्सर असंगठित विकल्प से बेहतर वेतन और सुरक्षा मानकों के साथ आती हैं, और यह आम तौर पर नई तकनीक और प्रक्रिया की जानकारी भी लाती है जो स्थानीय सप्लायरों तक पहुंचती है। सेवा और खुदरा क्षेत्र में विदेशी पूंजी का मतलब ज़्यादा प्रतिस्पर्धा भी रहा है, जो कीमतें घटाने और विकल्प बढ़ाने की दिशा में काम करती है। लेकिन आबादी के हिसाब से देखें तो $81.04 अरब का रिकॉर्ड निवेश भी प्रति व्यक्ति सालाना सिर्फ़ लगभग $55-56 ही बनता है (भारत की आबादी लगभग 1.46 अरब है) — यह याद दिलाता है कि इतना बड़ा हेडलाइन आंकड़ा भी ज़्यादातर भारतीयों के जीवन को सीधे या समान रूप से नहीं छूता। इसके फ़ायदे भौगोलिक रूप से भी सीमित हैं: सिर्फ़ महाराष्ट्र ने FY2024-25 के 39% निवेश को खींचा, इसके बाद कर्नाटक (13%) और दिल्ली (12%) रहे, जबकि ज़्यादातर राज्यों को इससे बहुत कम हिस्सा मिला।
आत्मनिर्भरता का पहलू, और उसकी सीमा
लगातार विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की विकास कहानी और उसके 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस' प्रयासों में भरोसे के वोट के रूप में देखा जाता है — यही एक वजह है कि कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां अब भारत को दूर से सेवा देने वाले बाज़ार के बजाय अपने आप में एक मैन्युफैक्चरिंग और सेवा आधार मानती हैं। लेकिन नेट FDI में आई गिरावट एक सीधी-सादी आत्मनिर्भरता वाली कहानी को जटिल बना देती है: यदि आने और जाने वाली पूंजी लगभग बराबर हो रही है, तो ज़रूरी नहीं कि भारत हर साल विदेशी-स्वामित्व वाली उत्पादक क्षमता का बड़ा भंडार बना रहा हो, भले ही सकल हेडलाइन आंकड़ा बढ़ता रहे। ईमानदार तस्वीर के लिए सकल और नेट, दोनों आंकड़ों को साथ देखना ज़रूरी है, सिर्फ़ सकल आंकड़े को नहीं।
स्रोत
- India Records USD 81.04 Billion FDI Inflow in FY 2024-25Press Information Bureau, Government of IndiaOfficial / primary source
- India's FDI inflows jump 14% to cross $81 billion in 2024-25News on Air (Prasar Bharati, Government of India)Official / primary source
- Net FDI into India falls to $0.4 bn in FY25 amid repatriation surgeBusiness StandardReputable media
- India's net FDI plunges 96 percent in 2024-25, RBI calls it 'sign of mature market'The South FirstReputable media
- Net FDI into India rises sharply to $7.65 billion in FY26: RBI dataBusiness StandardReputable media
- India FDI Inflows Reach US$58.85 Bn in FY 2025-26: Mapping Top Growth Sectors for InvestorsIndia Briefing (Dezan Shira & Associates)Reputable media
- FDI in India (FY14-FY26): Growth Trend, and Key Insights 2025FactoDataSecondary source
- India — population infobox figureWikipediaSecondary source
आख़िरी बार सत्यापित: 16 सित॰ 2026
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