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विदेश पढ़ने जाने वाले भारतीय 2023 के 9.08 लाख से घटकर 2025 में 6.26 लाख — मंत्रालय इसे व्यक्तिगत पसंद कहता है और कोई कारण नहीं देता

प्रकाशित: 18 अक्टू॰ 2026

जन॰ 2023दिस॰ 2025

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विदेश पढ़ने जाने वाले भारतीय (लाख), 2026 के उत्तर में आव्रजन ब्यूरो के आंकड़े

2023
9.08
2025
6.26
2024
7.7

विदेश पढ़ने जाने वाले भारतीय दो साल में लगभग एक-तिहाई घटे हैं, पर आधिकारिक उत्तर कोई कारण नहीं देता और दोनों सरकारी उत्तर 2023 के आधार पर अलग हैं।

राज्यसभा को क्या बताया गया

PTI द्वारा 11 फ़रवरी 2026 को रिपोर्ट किए गए राज्यसभा के लिखित उत्तर में शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने बताया कि 2023 में 9.08 लाख से अधिक भारतीय पढ़ाई के लिए विदेश गए, जो 2024 में घटकर 7.7 लाख और 2025 में 6.26 लाख रह गए। यह 2023 से 2025 तक लगभग 31% की गिरावट है (हमारा गणित)। आंकड़े गृह मंत्रालय के आव्रजन ब्यूरो के 2023 से 2025 के हैं। रिपोर्ट प्रश्न संख्या या प्रश्न की सटीक तारीख़ नहीं देती।

पहले का उत्तर, 2023 का अलग आंकड़ा

दिसंबर 2024 में उसी मंत्री ने राज्यसभा को बताया, जैसा आकाशवाणी ने रिपोर्ट किया, कि 2023 में लगभग 8.92 लाख भारतीय छात्र विदेश गए और 2019 में लगभग 5.86 लाख, फिर आव्रजन ब्यूरो के उन लोगों के आंकड़ों पर आधारित जिन्होंने यात्रा का उद्देश्य पढ़ाई बताया। 2023 का आंकड़ा 2026 के उत्तर में 9.08 लाख है और 2024 के उत्तर में लगभग 8.92 लाख। रिपोर्टें अंतर नहीं समझातीं; अंतर्निहित आंकड़ों का संशोधन संभव है पर हम पुष्टि नहीं कर सके।

कारण पर मंत्रालय क्या कहता है

मंत्रालय ने गिरावट की व्याख्या नहीं की। PTI रिपोर्ट के अनुसार उत्तर कहता है कि विदेश में पढ़ाई व्यक्ति की इच्छा और पसंद का विषय है, जो वहन-क्षमता, बैंक ऋण की उपलब्धता, विदेशी समाजों के अनुभव और किसी विषय की अभिरुचि जैसे कारकों पर निर्भर है। वह छात्रों को आकर्षित करने के NEP 2020 के क़दम भी गिनाता है, जिनमें 14 विदेशी संस्थानों की मंज़ूरी और गुजरात के गिफ़्ट सिटी में काम करने के लिए पाँच विदेशी विश्वविद्यालयों को हरी झंडी शामिल है।

दूसरी दिशा

दिसंबर 2024 के उत्तर के अनुसार, आकाशवाणी के मुताबिक, 2021-22 में लगभग 46,800 विदेशी छात्र भारतीय उच्च शिक्षा में पंजीकृत थे, जबकि 2017-18 में लगभग 46,000, और 'स्टडी इन इंडिया' कार्यक्रम 2018 में शुरू हुआ। यानी बाहर जाने वाले भारतीय छात्रों का प्रवाह आने वाले विदेशी छात्रों से कई गुना रहा है; रिपोर्टें इनकी सीधी तुलना नहीं करतीं।

सूक्ष्म नज़र: एक युवा के लिए

विदेशी डिग्री पर विचार कर रहे छात्र के लिए राष्ट्रीय आंकड़े कहते हैं कि दो साल पहले से कम भारतीय जा रहे हैं। वे यह नहीं बताते कि क्यों, और न यह कि कोई ख़ास देश आसान है या कठिन। खोज-परिणामों में हमने कुछ गंतव्यों के लिए वीज़ा अस्वीकृति में तेज़ बढ़त का दावा देखा, पर स्रोत नहीं पढ़ा, इसलिए उसे नहीं दोहराते।

व्यापक नज़र: पैसा और प्रतिभा बाहर जाना, या नहीं

विदेश जाने वाले छात्र ट्यूशन और रहने का ख़र्च देश से बाहर ले जाते हैं और कुछ वहीं काम के लिए रुक जाते हैं। कम जाने का मतलब घर पर पढ़ाई के लिए ज़्यादा रुकना, ज़्यादा लोगों का लौटाया जाना, या ख़र्च बहुत ऊँचा लगना हो सकता है। उत्तर 'व्यक्तिगत पसंद' की बात करता है और गंतव्य, पाठ्यक्रम या कारण का कोई बँटवारा नहीं देता।

जो शामिल नहीं

उत्तर स्वयं और उसके अनुलग्नक, देश-वार आंकड़े, वीज़ा-अस्वीकृति के आंकड़े, किसी एक समय विदेश में पढ़ रहे भारतीयों की संख्या, और गिरावट के कारण नहीं पढ़े गए। आव्रजन ब्यूरो की श्रृंखला पढ़ाई को उद्देश्य बताने वालों को गिनती है, जो दाख़िला लेने वालों जैसा नहीं है।

उच्च शिक्षाविदेश में पढ़ाईछात्र

स्रोत

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आख़िरी बार सत्यापित: 18 अक्टू॰ 2026

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