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2014 के बाद IT निर्यात लगभग तिगुना, लेकिन AI कंप्यूट क्षमता में भारत अभी अमेरिका-चीन से बहुत पीछे

प्रकाशित: 15 सित॰ 2026

अप्रैल 2014फ़र॰ 2026

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टेक उद्योग निर्यात

वित्त वर्ष 2013-14

$86 अरब

वित्त वर्ष 2025-26 (अनुमानित)

$246 अरब

कुल टेक उद्योग आय

वित्त वर्ष 2013-14
$118 अरब
वित्त वर्ष 2025-26 (अनुमानित)
$315 अरब
वार्षिक वृद्धि, वित्त वर्ष 2025-26
6.1%

IndiaAI Mission की GPU कंप्यूट क्षमता

शुरुआती लक्ष्य, मार्च 2024
10,000 GPU
दिसंबर 2025 (तैनात)
38,000+ GPU
लक्ष्य, 2026 के अंत तक
1,00,000 GPU

सेवा-निर्यात की कहानी दशकों पुरानी असली कामयाबी है; AI-कंप्यूट और चिप आत्मनिर्भरता की कहानी असली मगर अभी शुरुआती दौर की कोशिश है, बराबरी की नहीं।

दशकों पुरानी निर्यात कहानी, जो लगातार बढ़ती रही

भारत के IT-BPM/टेक क्षेत्र का निर्यात FY2013-14 के लगभग $86 अरब (कुल उद्योग आय $118 अरब पर) से बढ़कर NASSCOM की स्ट्रैटेजिक रिव्यू के अनुसार FY2025-26 में अनुमानित $246 अरब (कुल उद्योग आय लगभग $315 अरब के करीब) तक पहुंच गया — यानी लगभग बारह वर्षों में निर्यात में करीब 2.9 गुना बढ़त, हालांकि हाल के वर्षों में वैश्विक टेक खर्च घटने से यह वृद्धि दर सालाना सिर्फ़ 5-6% के मामूली स्तर तक सीमित हो गई है। IT सेवाएं (~$149 अरब), बिज़नेस प्रोसेस मैनेजमेंट (~$59 अरब), और इंजीनियरिंग R&D/ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (~$63 अरब) अब इस आय का बड़ा हिस्सा बनते हैं।

रोज़मर्रा में इसका मतलब क्या है

भारत के पारंपरिक IT हब से बाहर के किसी ग्रैजुएट के लिए यह बढ़त अक्सर एक असली, स्थानीय नौकरी के रूप में दिखती है: ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर — यानी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की इन-हाउस टेक/ऑपरेशन यूनिट जो वे भारत से चलाती हैं — अब सिर्फ़ बेंगलुरु और हैदराबाद तक सीमित न रहकर पुणे, अहमदाबाद और कोयंबटूर जैसे शहरों तक फैल गए हैं। भारत की लगभग 1.46 अरब की आबादी के हिसाब से देखें तो $246 अरब का टेक निर्यात प्रति व्यक्ति सालाना $170 से भी कम बनता है — यह याद दिलाता है कि इतना बड़ा सेवा-निर्यात क्षेत्र भी कार्यबल के एक खास, कुशल हिस्से को रोज़गार देता है, पूरे देश को समान रूप से नहीं।

नया मोर्चा: स्टार्टअप और शोधकर्ताओं के लिए सब्सिडी वाली AI कंप्यूट सुविधा

मार्च 2024 में केंद्रीय कैबिनेट ने ₹10,372 करोड़ की IndiaAI Mission को 10,000 GPU के शुरुआती लक्ष्य के साथ मंज़ूरी दी थी, जिसके बाद सरकार द्वारा सूचीबद्ध निजी कंपनियों (Jio, Tata, Yotta, CtrlS जैसे साझेदारों की डेटा-सेंटर क्षमता पर आधारित, सरकारी हार्डवेयर नहीं) का यह कंप्यूट पूल दिसंबर 2025 तक बढ़कर 38,000 से ज़्यादा GPU हो गया, जो स्टार्टअप, छात्रों और शोधकर्ताओं को सामान्य व्यावसायिक क्लाउड-GPU दरों से बहुत कम, सब्सिडी वाली ₹65 प्रति घंटे की दर पर किराए पर मिलते हैं। मिशन का घोषित लक्ष्य 2026 के अंत तक 1,00,000 GPU तक पहुंचना है। यह एक असली समस्या को सीधे हल करता है: पहले हाई-एंड AI कंप्यूट ज़्यादातर भारतीय शोधकर्ताओं और छोटे AI स्टार्टअप की पहुंच से बाहर थी, और उन्हें विदेशी क्लाउड प्रदाताओं से कई गुना ज़्यादा दर पर किराए पर लेना पड़ता था।

ईमानदार अंतर: कंप्यूट और चिप में अभी भी बड़ा फ़ासला

1,00,000 GPU के लक्ष्य पर भी, भारत का कंप्यूट आधार अमेरिका और चीन की स्थापित क्षमता के मुकाबले बहुत छोटा हिस्सा ही रहेगा — इंडस्ट्री ट्रैकरों के अनुसार इन दोनों देशों के पास हाई-एंड AI चिप की संख्या लाखों में है — और भारत ने जो GPU अभी तक तैनात किए हैं, उनमें से ज़्यादातर आयातित हैं (मुख्यतः Nvidia से), स्वदेशी रूप से नहीं बने। भारत की अपनी पहली सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट — गुजरात के धोलेरा में Tata Electronics-PSMC प्लांट, जिसे लगभग $10 अरब की India Semiconductor Mission का समर्थन है — अभी निर्माणाधीन है। यह 28-नैनोमीटर और उससे ऊपर के प्रोसेस नोड (पावर-मैनेजमेंट चिप, डिस्प्ले ड्राइवर, ऑटोमोटिव और औद्योगिक उपयोग) को लक्षित करती है, न कि उन अत्याधुनिक नोड को जो सबसे आगे के AI एक्सेलरेटर चलाते हैं, और व्यावसायिक स्तर का उत्पादन वित्त वर्ष 2029-30 से पहले लक्षित नहीं है। इसलिए सटीक तस्वीर यह है: भारत ने AI-कंप्यूट की पहुंच और निर्यात के पैमाने पर तेज़ी से कदम बढ़ाए हैं, लेकिन चिप-स्तर की आत्मनिर्भरता और अत्याधुनिक कंप्यूट क्षमता अभी भी वर्षों दूर हैं, कोई हासिल की गई उपलब्धि नहीं — यह अंतर स्वतंत्र विश्लेषकों (भारत के अपने Observer Research Foundation सहित) ने भी साफ़ तौर पर बताया है, भले ही वे भारत की तेज़ी से सुधरती स्थिति को भी नोट करते हैं।

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स्रोत

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आख़िरी बार सत्यापित: 16 सित॰ 2026

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