2014 के बाद भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता में लगभग 84% बढ़ोतरी — पर सरकार के अपने 2024 लक्ष्य से काफी पीछे
प्रकाशित: 24 सित॰ 2026
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स्थापित परमाणु ऊर्जा क्षमता
2024 के लिए परमाणु क्षमता लक्ष्य बनाम असल उपलब्धि
2047 तक परमाणु क्षमता लक्ष्य
2026 (मौजूदा)
~8,780 MW
2047 (सरकार का लक्ष्य)
100,000 MW (100 GW)
असली क्षमता जोड़ी गई — जिसमें भारत के पहले स्वदेशी 700 MW रिएक्टर भी शामिल हैं — लेकिन इसी अवधि के लिए सरकार के अपने क्षमता लक्ष्य (2024 तक 17,000 MW, बाद में 14,600 MW) दोनों ही पूरे नहीं हो सके, जो एक कहीं पुराने पैटर्न को जारी रखता है।
निर्माण: 4,780 MW से 8,780 MW तक
2013-14 में भारत की स्थापित परमाणु ऊर्जा क्षमता लगभग 4,780 MW थी (20 रिएक्टरों में)। जुलाई 2024 तक, राज्यसभा में दिए गए एक लिखित जवाब के अनुसार यह क्षमता 24 रिएक्टरों में 8,180 MW हो गई, और 2025-26 तक यह और बढ़कर लगभग 8,780 MW हो गई — यानी एक दशक में लगभग 84% की बढ़ोतरी, साथ ही 8 और रिएक्टर (लगभग 6,028 MWe) निर्माणाधीन हैं। इसी अवधि में एक असली तकनीकी उपलब्धि भी हासिल हुई: काकरापार यूनिट 3 (गुजरात) ने जून 2023 में और यूनिट 4 ने मार्च 2024 में वाणिज्यिक परिचालन शुरू किया — यह भारत के पहले स्वदेशी रूप से डिज़ाइन किए गए 700 MWe दाबित भारी जल रिएक्टरों (PHWR) की जोड़ी है, जो 1980 के दशक से इस्तेमाल हो रहे 220 MWe स्वदेशी PHWR डिज़ाइन से एक बड़ा कदम है। इसके अलावा, कुडनकुलम में रूसी डिज़ाइन के 1,000 MWe VVER रिएक्टर (यूनिट 3 और 4) अब भी निर्माणाधीन हैं, जो अगस्त 2025 तक लगभग 78% पूरे हो चुके हैं।
ईमानदार सच्चाई: सरकार के लक्ष्य फिर पूरे नहीं हुए
जुलाई 2014 में, सरकार ने परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) से 2024 तक परमाणु क्षमता को तीन गुना करके 17,000 MW तक पहुंचाने का आग्रह किया था। मार्च 2017 तक, संसद को बताया गया कि एक ज़्यादा यथार्थवादी लक्ष्य 2024 तक 14,600 MW का है। दोनों में से कोई भी पूरा नहीं हुआ: 2024 तक असल क्षमता लगभग 8,180 MW रही — यानी घटाए गए लक्ष्य का भी लगभग आधा, और मूल लक्ष्य का आधे से भी कम। यह कोई नई या अनोखी विफलता नहीं है: भारत का परमाणु कार्यक्रम दशकों से, कई सरकारों के दौरान, अपने ही तय लक्ष्यों से पीछे रहा है — परमाणु ऊर्जा विभाग ने 1960 के दशक में 1987 तक 20,000 MW का लक्ष्य रखा था, पर हासिल हुआ सिर्फ 512 MW; 2000 तक के 43,500 MW के लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 2,720 MW हासिल हुआ; 2004 में तय किए गए 2020 तक 20,000 MW के लक्ष्य के मुकाबले, निर्माणाधीन सभी रिएक्टरों को गिनने पर भी सिर्फ लगभग 10,080-11,480 MW हासिल हो सका। यह पैटर्न असली, बार-बार सामने आने वाली बाधाओं को दर्शाता है — 1974 और 1998 के परमाणु परीक्षणों के बाद लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और तकनीक-निषेध व्यवस्था के चलते आयात पर निर्भरता (जो 2008 के भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते से सिर्फ आंशिक रूप से कम हुई), संयंत्र स्थलों पर भूमि अधिग्रहण और स्थानीय विरोध, और लागत व समय-सीमा में बढ़ोतरी (कुडनकुलम 3 और 4 की लागत मूल स्वीकृत बजट से कथित तौर पर लगभग 73% ज़्यादा रही) — जो किसी एक सरकार, यहां तक कि मौजूदा सरकार से भी, कहीं आगे तक बनी रही है।
एक आम बिजली उपभोक्ता के लिए इसका क्या मतलब है, और क्या नहीं
परमाणु ऊर्जा अब भी भारत के कुल बिजली उत्पादन का सिर्फ लगभग 3% हिस्सा देती है, इसलिए ये छूटे हुए लक्ष्य घरेलू बिजली की लागत या उपलब्धता का मुख्य कारण नहीं रहे हैं — इस अवधि में जोड़ी गई ज़्यादातर उत्पादन क्षमता कोयले और नवीकरणीय ऊर्जा से आई (इस बारे में इस साइट की renewable-energy-capacity-growth प्रविष्टि देखें, जिसमें अपनी खुद की ईमानदार क्षमता-बनाम-उत्पादन की खाई भी बताई गई है)। स्वदेशी PHWR तकनीक का महत्व कल के बिजली बिल से ज़्यादा दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता में है: घरेलू स्तर पर डिज़ाइन और निर्मित 700 MWe रिएक्टर, कुडनकुलम जैसे आयातित VVER डिज़ाइनों की तुलना में, भविष्य के संयंत्रों के लिए आयातित रिएक्टर पुर्जों और विदेशी ईंधन-आपूर्ति व्यवस्थाओं पर भारत की निर्भरता कम करता है।
2047 का नया लक्ष्य, इस इतिहास की रोशनी में
केंद्रीय बजट 2025-26 में सरकार ने Nuclear Energy Mission की घोषणा की, जिसका लक्ष्य 2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता है — यानी आज की क्षमता से लगभग 11 गुना — जिसके लिए Small Modular Reactor (SMR) अनुसंधान हेतु ₹20,000 करोड़ का आवंटन, 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी रूप से डिज़ाइन किए गए SMR चालू करने का लक्ष्य, और परमाणु क्षेत्र को निजी भागीदारी के लिए खोलने हेतु कानूनी बदलाव शामिल हैं। सरकार के रोडमैप अनुमान (केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण) के अनुसार, नज़दीकी अवधि में 2031-32 तक क्षमता लगभग 22,000-22,500 MW रहने का अनुमान है — जो 2047 के अंतिम लक्ष्य का लगभग पांचवां हिस्सा ही है। परमाणु लक्ष्यों के बार-बार छूटने और घटाए जाने का यह दस्तावेज़ीकृत, दशकों पुराना, कई सरकारों तक फैला पैटर्न — जो खासतौर पर 2014-2024 की अवधि में भी जारी रहा — देखते हुए, 2047 तक 100 GW के आंकड़े को एक तय भरोसेमंद संख्या के बजाय एक घोषित महत्वाकांक्षा के रूप में ही देखा जाना बेहतर होगा।
स्रोत
- 21 nuclear reactors with a total capacity of 15,300 MW are at various stages of implementation: Govt (Rajya Sabha reply, July 2024)News on Air (Prasar Bharati, Government of India)Official / primary source
- Nuclear Power in IndiaWorld Nuclear AssociationSecondary source
- India's 100 GW Nuclear Power AmbitionDrishti IASSecondary source
- India's first indigenously developed 700 MWe Kakrapar nuclear power plant Unit 3 begins operation at full capacityBusiness TodayReputable media
- Start-up and commissioning phase of unit 3 of India's Kudankulam NPP may begin in mid-2026InterfaxReputable media
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