मोदी ने किया क्या है?
मिश्रित प्रभाव

पीएम सूर्य घर योजना: 50 लाख से अधिक घरों तक पहुंची छत पर सौर बिजली — 1 करोड़ के लक्ष्य के सामने असली तस्वीर

प्रकाशित: 30 सित॰ 2026

फ़र॰ 2024सित॰ 2026

पहले बनाम अभी

योजना के तहत छत पर सौर ऊर्जा वाले घर, बनाम 1 करोड़ के लक्ष्य के

लक्ष्य (31 मार्च 2027 तक)

1 करोड़ (1,00,00,000) घर

प्राप्त (अगस्त 2026 की शुरुआत तक)

लगभग 50.06 लाख (50,06,000) घर — लक्ष्य का करीब 50%

योजना के तहत चालू हुई छत सौर क्षमता

लक्षित क्षमता (मार्च 2027 तक)

लगभग 30 गीगावाट

अगस्त 2026 तक चालू

लगभग 14.8 गीगावाट

कुल योजना परिव्यय की तुलना में जारी की गई केंद्रीय सब्सिडी

कुल स्वीकृत परिव्यय

₹75,021 करोड़

अगस्त 2026 तक जारी

₹28,024 करोड़ (परिव्यय का लगभग 37%)

शून्य बिजली बिल वाले / अतिरिक्त बिजली बेचकर कमाई करने वाले घर

योजना से पहले

इस स्तर की कोई तुलनीय घरेलू नेट-मीटरिंग भुगतान योजना पहले मौजूद नहीं थी

अगस्त 2026 तक

19 लाख घरों का बिजली बिल शून्य; 12 लाख से अधिक घरों ने अतिरिक्त बिजली बेचकर ₹421 करोड़ कमाए (वित्त वर्ष 2024-25)

1 करोड़ घरों को मुफ्त सौर बिजली का वादा था — अभी तक उसका थोड़ा ज़्यादा आधा हिस्सा पूरा हुआ है, साथ ही असली बचत और असली देरी दोनों साथ-साथ चल रही हैं।

योजना का वादा क्या है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 फरवरी 2024 को पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना की घोषणा की; केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे ₹75,021 करोड़ के कुल परिव्यय के साथ औपचारिक मंज़ूरी दी। योजना के तहत पहले 2 किलोवाट के लिए प्रति किलोवाट ₹30,000 (यानी 2 किलोवाट के सिस्टम पर ₹60,000) और तीसरे किलोवाट के लिए ₹18,000 की सब्सिडी दी जाती है, जो 3 किलोवाट या उससे बड़े सिस्टम पर अधिकतम ₹78,000 तक जाती है — यह आधिकारिक तौर पर एक सामान्य सिस्टम की लागत का 40-60% कवर करने के लिए काफी है और उपभोग की सीमा में रहने वाले घर को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देती है। योजना का लक्ष्य वित्त वर्ष 2026-27 के अंत (31 मार्च 2027) तक 1 करोड़ घरों और लगभग 30 गीगावाट छत सौर क्षमता का है। पात्रता के लिए आवेदक को भारतीय नागरिक होना चाहिए, घर पर वैध मालिकाना हक और पर्याप्त छत की जगह होनी चाहिए, वैध बिजली कनेक्शन होना चाहिए, और उसने पहले किसी अन्य सरकारी योजना से सौर सब्सिडी न ली हो; इस्तेमाल होने वाला हर पैनल सरकार की अनुमोदित मॉडल और निर्माता सूची (ALMM) में शामिल होना चाहिए — यानी किसी भी आयातित पैनल के लिए खुला बाज़ार नहीं, बल्कि घरेलू निर्माण को प्राथमिकता।

असली आंकड़ा: लक्ष्य के सामने कितनी स्थापना हुई

योजना की अपनी रिपोर्ट की गई प्रगति, हर पड़ाव पर, असली मगर अधूरी तस्वीर दिखाती है। अक्टूबर 2025 के आंकड़ों में सरकार ने बताया कि लगभग 17.14 लाख स्थापनाएं हो चुकी थीं (21.52 लाख घरों ने आवेदन कर मंज़ूरी पा ली थी), 6.38 गीगावाट क्षमता चालू हो चुकी थी, और घरेलू लक्ष्य का लगभग 13% ही पूरा हुआ था। 16 मार्च 2026 को लोकसभा में दिए गए जवाब में सरकार ने बताया कि 32,02,697 घरों को लाभ मिला है और 25,87,685 रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं। अगस्त 2026 की शुरुआत में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय और केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बताया कि योजना 50.06 लाख घरों को पार कर चुकी है, लगभग 14.8 गीगावाट क्षमता चालू हो चुकी है, और ₹75,021 करोड़ के परिव्यय में से ₹28,024 करोड़ सब्सिडी के रूप में जारी किए जा चुके हैं। यह 1 करोड़ घरों के लक्ष्य का महज़ आधे से थोड़ा ज़्यादा है, और 31 मार्च 2027 की समय-सीमा के लिए करीब सात महीने ही बचे हैं। रफ्तार तेज़ी से बढ़ी है — अक्टूबर 2025 में रोज़ाना लगभग 5,000 स्थापनाओं से जुलाई 2026 में रोज़ाना 16,000 से ज़्यादा, यानी तीन गुने से अधिक — लेकिन बाकी बचे महीनों में इस तेज़ रफ्तार को बनाए रखने पर भी लगभग 50 लाख घरों का अंतर पाटना होगा। यह किसी बाहरी आलोचक का आरोप नहीं है — यह सरकार के अपने प्रकाशित आंकड़ों के भीतर का सीधा गणित है।

एक घर के लिए इसका मतलब — और भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए

जिन घरों में सौर पैनल लग गए हैं, उनके लिए असर ठोस है: अगस्त 2026 तक, उनमें से 19 लाख घरों का बिजली बिल शून्य हो गया, और 12 लाख से ज़्यादा घरों ने मिलकर नेट-मीटरिंग के ज़रिए अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेचकर वित्त वर्ष 2024-25 में ₹421 करोड़ कमाए — यह असली पैसा है, कोई काल्पनिक बचत नहीं। लेकिन देश के आकार के सामने रखने पर यह संख्या अब भी छोटी है: 2024 के अनुमानित लगभग 33.5 करोड़ घरों में से लगभग 50 लाख सौर घर, यानी देश के कुल घरों का करीब 1.5% — यह असली प्रगति है, लेकिन एक छोटे आधार से शुरू हुई, और सिर्फ लाखों की गिनती बताने के बजाय इसे साफ़ तौर पर कहना ज़रूरी है। इसमें एक शांत आत्मनिर्भरता का पहलू भी है: सब्सिडी वाला हर पैनल सरकार की अनुमोदित मॉडल और निर्माता सूची से ही आना चाहिए, और आयातित पैनलों पर 40% मूल सीमा शुल्क लगता है — मिलकर, यह इस मांग को आयातित (अक्सर चीनी) सेल और मॉड्यूल के बजाय भारत के अपने, अभी बढ़ते सौर-निर्माण आधार की ओर मोड़ने की जानबूझकर की गई कोशिश है — घरेलू फ़ायदे के साथ-साथ देश की ऊर्जा-निर्माण क्षमता में एक छोटा मगर असली इज़ाफ़ा।

रुकावटें: देरी, विवाद, और एक असमान नक्शा

योजना की अपनी रिपोर्टिंग और संसद के आंकड़े एक असमान रोलआउट दिखाते हैं: गुजरात सबसे आगे है, जहां लगभग 5.94 लाख स्थापनाओं से 8.56 लाख घर लाभान्वित हुए हैं और देश की सबसे ज़्यादा छत सौर क्षमता वहीं लगी है, महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर है; जबकि पश्चिम बंगाल, झारखंड और कई पूर्वोत्तर राज्यों जैसे कुछ राज्यों में इसी अवधि तक 1,000 से भी कम घर कवर हो पाए थे — यह अंतर संसद में भी सामने आया और स्वतंत्र मीडिया (द प्रिंट) ने भी इसे रिपोर्ट किया, यह छुपाई गई बात नहीं है। ज़मीन पर दिखने वाली रुकावटें भी सुनी-सुनाई नहीं, बल्कि दर्ज हैं: सरकार का अपना मानक है कि कमीशनिंग सर्टिफिकेट मिलने के 30 कार्य-दिवसों में सब्सिडी जारी हो जाए, लेकिन कई राज्यों में असल घरों को तीन से पांच महीने तक इंतज़ार करना पड़ा है, जबकि गुजरात और पंजाब जैसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्य इस मानक के करीब बने हुए हैं; नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने खुद स्थापना के बाद डिस्कॉम की गलत बिलिंग की बढ़ती शिकायतों की बात मानी है; और स्वतंत्र रिपोर्टिंग (डाउन टू अर्थ, मरकॉम इंडिया) ने कुछ स्थानीय वेंडरों की असंगत स्थापना गुणवत्ता और मानकीकृत, एंड-टू-एंड गुणवत्ता गारंटी की कमी को दर्ज किया है। इससे उन असली घरों की असली बचत मिट नहीं जाती जो अब तक योजना से जुड़े हैं — यह सिर्फ वह बुनावट है जो सुर्खी वाली संख्या में नहीं दिखती।

नवीकरणीय ऊर्जाछत पर सौर ऊर्जासब्सिडी योजनाऊर्जा आत्मनिर्भरता

स्रोत

शेयर करेंWhatsAppXFacebook

आख़िरी बार सत्यापित: 30 सित॰ 2026

इस जानकारी में कोई गलती दिखे तो बताएं

चर्चा

चर्चा में शामिल होने के लिए Google से साइन इन करें।

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं है। अपनी राय साझा करने वाले पहले व्यक्ति बनें।