81.35 करोड़ लोगों को मुफ़्त अनाज पर सालाना लगभग ₹2.3 लाख करोड़ का ख़र्च — रिसाव के अनुमान घटे हैं, पर कवरेज अब भी 2011 के आंकड़ों पर टिका है
प्रकाशित: 18 अक्टू॰ 2026
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PDS अनाज रिसाव का अनुमान (शोधकर्ताओं का, सर्वेक्षण बनाम उठाव)
PMGKAY ख़र्च (₹ करोड़)
कवर किए गए लोग (करोड़)
राज्यों द्वारा पहचाने, अगस्त 2025
80.6
2011-आधारित सीमा में अधिकतम
81.35
हटाए गए राशन कार्ड (करोड़)
जनवरी 2013 से 15वें वित्त आयोग की रिपोर्ट (2021) तक
लगभग 2.75
दिसंबर 2025 तक
6.77
मुफ़्त अनाज लगभग उन सभी तक पहुँचता है जिन्हें क़ानून पात्र गिनता है, और मापा गया रिसाव तेज़ी से घटा है। पर पात्रता की सूची 2011 की जनगणना के बाद अपडेट नहीं हुई, ताज़ा रिसाव आँकड़ा कमज़ोर है, और बिल बढ़ रहा है।
योजना क्या है और क्या मंज़ूर हुआ
29 नवंबर 2023 को मंत्रिमंडल ने तय किया कि केंद्र प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत लगभग 81.35 करोड़ लाभार्थियों को 1 जनवरी 2024 से पाँच साल तक मुफ़्त अनाज देगा, अनुमानित ₹11.80 लाख करोड़ की लागत से। यह राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के ऊपर चलती है: अंत्योदय परिवारों (सबसे ग़रीब) को महीने में 35 किलो और प्राथमिक परिवारों को प्रति व्यक्ति 5 किलो मिलता है। PRS लेजिस्लेटिव रिसर्च के अनुसार जनवरी 2026 में 2.3 करोड़ अंत्योदय और 18.3 करोड़ प्राथमिक परिवार हैं। PRS के अनुसार जनवरी 2023 से योजना में अनाज पूरी तरह मुफ़्त है।
ख़र्च कितना है
2026-27 के बजट पर PRS का विश्लेषण PMGKAY का ख़र्च 2024-25 में ₹1,99,500 करोड़, 2025-26 में संशोधित ₹2,27,754 करोड़ (मूल ₹2,03,000 करोड़ अनुमान से 12% अधिक) और 2026-27 में बजट ₹2,27,429 करोड़ बताता है, जो खाद्य विभाग के आवंटन का 97% और खाद्य सब्सिडी के रूप में GDP का लगभग 0.6% है। ज़्यादातर लागत वह है जो भारतीय खाद्य निगम अनाज के लिए देता है: 2024-25 में उसकी पूरी लागत गेहूँ के लिए ₹28.5 प्रति किलो और चावल के लिए ₹40.4 प्रति किलो थी, जिसका लगभग 80% किसानों को दिया गया दाम है। केंद्र राज्यों से जो मूल्य लेता है वह 2013 के स्तर से कभी बढ़ाया नहीं गया और 2023 से शून्य है, इसलिए अंतर सब्सिडी से पाटा जाता है।
रिसाव: अनुमान, और ताज़ा अनुमान कमज़ोर क्यों है
यहाँ रिसाव का अर्थ है वितरण के लिए भेजा गया वह अनाज जिसका उपभोग परिवार नहीं बताते। सर्वेक्षण आंकड़ों को अनाज उठाव से मिलाने वाले शोधकर्ताओं ने इसे 2011-12 में 41.7% और 2022-23 में 24.1% आँका (एक अन्य अध्ययन 22.1% और तीसरा 28.1% देता है), फिर 2023-24 में 8.8%। 8.8% वाले लेखक कहते हैं कि उस गिरावट का बड़ा हिस्सा इसलिए है कि महामारी के अतिरिक्त मुफ़्त वितरण 2022 के अंत में बंद हुए, और पाँच राज्यों में रिसाव ऋणात्मक आता है, जिसे वे संकेत मानते हैं कि सर्वेक्षण उपभोग को बढ़ाकर आँकता है या जनसंख्या अनुमान ग़लत हैं। वे पहले की गिरावट का श्रेय राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के सुधारों, जैसे डिजिटल राशन कार्ड और कंप्यूटरीकृत आपूर्ति शृंखला, को भी देते हैं। 8.8% को अनिश्चित अनुमान की तरह पढ़ना चाहिए, मापे हुए तथ्य की तरह नहीं।
कौन कवर है: 2013 में तय सूची
योजना जनगणना 2011 के अनुसार 67% आबादी को कवर करती है, अधिकतम लगभग 81.35 करोड़ लोग; अगस्त 2025 तक राज्यों ने 80.6 करोड़ की पहचान की थी, और मौजूदा सीमा में 79 लाख की गुंजाइश है। सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में कहा कि केंद्र को कवर किए जाने वाले लोगों की संख्या दोबारा तय करनी चाहिए। अगस्त 2025 में खाद्य विभाग ने कहा कि नई जनगणना के बिना दोबारा तय करना उचित नहीं होगा; अगली जनगणना 2027 में होनी है। PRS दोनों ओर का दबाव गिनाता है: आबादी बढ़ी है (2011 से 2026 के बीच अनुमानित 18%), जिससे पात्र लोग छूट सकते हैं, जबकि ग़रीबी घटी है ($3.00 प्रतिदिन की रेखा पर 2011-12 के 27.1% से 2022-23 में 5.3%, एक PIB फ़ैक्टशीट के अनुसार), जिससे अपात्र परिवार सूची में रह सकते हैं। 2015 की एक उच्च-स्तरीय समिति ने कहा था कि 67% ऊँचा है और 40% ग़रीबी रेखा के नीचे वालों को आराम से कवर कर सकता है।
हटाए गए राशन कार्ड
15वें वित्त आयोग ने दर्ज किया कि जनवरी 2013 से लगभग 2.75 करोड़ राशन कार्ड भूतिया, फ़र्ज़ी, दोहरे या अपात्र होने, या मृत्यु व प्रवासन के आधार पर हटाए गए, और कहा कि इससे कुल ख़र्च नहीं घटा क्योंकि पात्र लोग जोड़े गए। PRS के हवाले से लोकसभा के उत्तर में दिसंबर 2025 तक 6.77 करोड़ हटाए गए हैं। लगभग 99% कार्ड आधार से जुड़ चुके हैं। यह प्रविष्टि नहीं जानती कि कितने हटाव असली लाभार्थियों के ग़लत हटाव थे; पढ़े गए किसी स्रोत में यह संख्या नहीं है।
सूक्ष्म दृष्टि: एक परिवार क्या महसूस करता है
पाँच सदस्यों वाले प्राथमिक परिवार का हक़ महीने में 25 किलो अनाज बिना दाम का है, और अंत्योदय परिवार को 35 किलो मिलता है। सबसे ग़रीब के लिए यह महीने के खाने के बिल का बड़ा हिस्सा है। आंकड़े यह नहीं दिखाते कि अनाज हर पात्र व्यक्ति तक पहुँचता है या नहीं, सूची से हटाया गया परिवार सचमुच अपात्र था या नहीं, या केवल अनाज पोषण के लिए काफ़ी है या नहीं।
व्यापक दृष्टि: बिल और ढाँचा
लगभग ₹2.3 लाख करोड़ सालाना पर PMGKAY खाद्य विभाग के बजट की सबसे बड़ी मद है और खेती के दामों से जुड़ी है: समर्थन मूल्य बढ़ता है तो सब्सिडी भी बढ़ती है, क्योंकि निर्गम मूल्य शून्य है। यह सरकारी अनाज ख़रीद को भी सहारा देती है, जो PRS के अनुसार कुछ ही राज्यों में केंद्रित है। इसलिए योजना की लागत कल्याण से परे के फ़ैसलों को भी दर्शाती है।
जो शामिल नहीं है
चालू वर्ष का टनभार, राज्यवार वितरण, अनाज की गुणवत्ता, पोषण परिणाम, भूख या उपभोग सर्वेक्षण के नतीजे, और रिसाव अध्ययनों पर खाद्य मंत्रालय का अपना जवाब नहीं पढ़े गए। मंत्रिमंडल की विज्ञप्ति एक मिरर साइट (pmindia.gov.in) पर पढ़ी गई; PIB का मूल पाठ और PRS द्वारा उद्धृत लोकसभा व राज्यसभा के उत्तर नहीं खोले गए।
स्रोत
- Free Foodgrains for 81.35 crore beneficiaries for five years: Cabinet Decision (29 November 2023)Prime Minister's Office (pmindia.gov.in), carrying the Cabinet decision releaseOfficial / primary source
- Demand for Grants 2026-27 Analysis: Food and Public DistributionPRS Legislative ResearchReputable media
- Declining PDS leakages: A look at the numbers (Pingali and Puri, 11 August 2025)Ideas for India (International Growth Centre)Secondary source
आख़िरी बार सत्यापित: 18 अक्टू॰ 2026
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