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भारत में टीबी की दर 2015 से 2024 के बीच 21% घटी (237 से 187 प्रति लाख), वैश्विक रफ़्तार से लगभग दोगुनी — पर WHO के 50% के पड़ाव से कम, और दुनिया के लगभग एक-चौथाई मामले अब भी भारत में

प्रकाशित: 18 अक्टू॰ 2026

जन॰ 2015दिस॰ 2024

पहले बनाम अभी

भारत में टीबी की अनुमानित दर, प्रति 1,00,000 आबादी (WHO)

2015
237
2024
187
वैश्विक गिरावट 2015-24 (WHO पड़ाव: 50%)
12.3%

एचआईवी-नकारात्मक लोगों में अनुमानित टीबी मृत्यु दर, प्रति 1,00,000 (WHO)

2015

28

2024

21

टीबी उपचार कवरेज: अनुमानित मामलों के मुक़ाबले दर्ज मामलों का हिस्सा (WHO)

2015

53%

2024

92%

भारत में दर्ज नए और दोबारा हुए टीबी मामले (WHO)

2015
16.7 लाख
2024
25.0 लाख
अनुमानित मामले, 2024 (2015: 31.4 लाख)
27.1 लाख

टीबी की दर और मौतें घटी हैं और कहीं ज़्यादा मरीज़ खोजे और इलाज में लाए जा रहे हैं। पर गिरावट 50% के पड़ाव के मुक़ाबले 21% है, आंकड़े चौड़े दायरे वाले मॉडल-अनुमान हैं, और सबसे ज़्यादा मामले अब भी भारत में हैं।

भारत के लिए WHO के आंकड़े क्या कहते हैं

वैश्विक टीबी रिपोर्ट 2025 (12 नवंबर 2025 को जारी) के लिए WHO का डेटाबेस भारत में टीबी की दर 2015 में 237 प्रति एक लाख आबादी (अनिश्चितता दायरा 181 से 300) और 2024 में 187 (दायरा 160 से 218) आँकता है: यानी 21% की गिरावट। एचआईवी-नकारात्मक लोगों में अनुमानित टीबी मृत्यु दर 28 से घटकर 21 प्रति लाख हुई (दायरे 21 से 36 और 16 से 26), और अनुमानित मौतें 3,75,000 से 3,00,000 यानी 20% कम। दोनों गिरावटें अलग इसलिए हैं कि आबादी बढ़ी। WHO का उपचार-कवरेज पैमाना, यानी दर्ज नए और दोबारा हुए मामले भाग अनुमानित मामले, 53% से 92% हुआ। तुलना के लिए, WHO के अनुसार 2015 से 2024 के बीच वैश्विक दर 12.3% और दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र की 16% घटी।

जो पड़ाव छूट गया

WHO की End TB रणनीति ने 2015 के मुक़ाबले 2025 तक दर में 50% और मौतों में 75% कटौती के पड़ाव रखे थे। WHO कहता है कि दुनिया दोनों से बहुत दूर है (2024 तक दर 12.3% और मौतें 29% कम)। भारत की दर में 21% गिरावट वैश्विक रफ़्तार से लगभग दोगुनी है, पर पड़ाव के आधे से कम। भारत की मृत्यु-दर में गिरावट (25%) और मौतों की गिनती में गिरावट (20%) भी 75% से काफ़ी पीछे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय भारत को टीबी के ख़िलाफ़ लड़ाई में 'मज़बूती से पटरी पर' बताता है; यह उसका अपना ढाँचा है, और यह प्रविष्टि राष्ट्रीय उन्मूलन लक्ष्य को नहीं पढ़ पाई, इसलिए उसका आकलन नहीं करती।

92% के साथ एक पाद-टिप्पणी क्यों ज़रूरी है

उपचार कवरेज दो संख्याओं का अनुपात है, और दोनों बदलीं। भारत में दर्ज नए और दोबारा हुए मामलों की WHO गिनती 2015 के 16,67,136 से 2024 में 24,98,584 हुई (लगभग 50% अधिक), जबकि उसका अनुमान 31.4 लाख से घटकर 27.1 लाख हुआ। स्वास्थ्य मंत्रालय बढ़ी अधिसूचनाओं को बेहतर पहचान मानता है, ज़्यादा बीमारी नहीं, और घटता अनुमान अनुपात का दूसरा हिस्सा है। चूँकि अनुमान मॉडल-आधारित है और 2024 का दायरा 23.3 से 31.6 लाख है, 92% को मॉडल के मुक़ाबले रिपोर्टिंग का पैमाना मानना चाहिए, इलाज पाए हर व्यक्ति की गिनती नहीं। मंत्रालय यह भी कहता है कि अनुमानित 'छूटे' मामले लगभग 15 लाख से घटकर एक लाख से कम रह गए; WHO की अपनी दो शृंखलाओं से अंतर 2015 में लगभग 14.7 लाख पर पर 2024 में लगभग 2.1 लाख निकलता है, इसलिए यह दूसरा आँकड़ा किसी अलग गिनती का है जिसका मिलान यह प्रविष्टि नहीं कर पाई।

सरकार क्या कर रही बताती है

स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिसंबर 2025 में संसद को बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान, जो एक जाँच अभियान है, ने 7 दिसंबर 2024 से 9 दिसंबर 2025 के बीच 26.43 लाख मामले पहचाने, जिनमें 9.19 लाख बिना लक्षण वाले थे, और राज्यसभा के एक उत्तर के अनुसार जनवरी से अक्टूबर 2025 के बीच 4.5 करोड़ लोगों की जाँच हुई। ये सरकारी बयान हैं जिन्हें ऑल इंडिया रेडियो और IANS ने रिपोर्ट किया, और इन्हें रिकॉर्ड से मिलाया नहीं गया।

सूक्ष्म दृष्टि: मरीज़ और परिवार को क्या महसूस होता है

टीबी भीड़ भरे घरों, कुपोषण और छूटी मज़दूरी की बीमारी है, और दर्ज मामलों के हिस्से का बढ़ना यानी ज़्यादा लोगों को मुफ़्त इलाज की पेशकश की संभावना। किसी परिवार का अनुभव उन बातों पर टिका है जो यहाँ के आंकड़े नहीं दिखाते: निदान में कितना समय लगा, दवाएँ उपलब्ध रहीं या नहीं, और पोषण व आय की मदद पहुँची या नहीं। इस प्रविष्टि ने इनमें से किसी पर डेटा नहीं पढ़ा।

व्यापक दृष्टि: वैश्विक तस्वीर

दुनिया के लगभग 25% नए मामले भारत में हैं (WHO के उसी खंड में 26% भी लिखा है), इसलिए टीबी के ख़िलाफ़ वैश्विक प्रगति काफ़ी हद तक भारत पर टिकी है। राष्ट्रीय स्तर पर 21% की गिरावट इसी कारण मायने रखती है। मौजूदा रफ़्तार से 2025 का पड़ाव अधूरा निकल चुका है; रफ़्तार बढ़ रही है या नहीं, यह दशक भर की यह तुलना नहीं दिखाती।

जो शामिल नहीं है

उपचार सफलता दर, दवा-प्रतिरोधी टीबी, वित्तपोषण, मरीज़ों को पोषण सहायता, निजी क्षेत्र की अधिसूचना और राष्ट्रीय उन्मूलन लक्ष्य इस प्रविष्टि के लिए नहीं पढ़े गए। WHO की भारत देश-प्रोफ़ाइल नहीं खोली गई। भारत का मृत्यु-अनुमान सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम पर टिका है, जिसका विस्तृत डेटा WHO के अनुसार उसे आधिकारिक रूप से नहीं भेजा गया है।

टीबीWHOजन स्वास्थ्य

स्रोत

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आख़िरी बार सत्यापित: 18 अक्टू॰ 2026

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