अग्निपथ का पहला बैच सेवा से बाहर होने के करीब — बरकरार रखने की दर बढ़ाने का प्रस्ताव, अभी मंजूरी नहीं
प्रकाशित: 30 सित॰ 2026
पहले बनाम अभी
4 वर्ष बाद स्थायी सेवा में बरकरार रखे जाने वाले अग्निवीरों का अनुपात
मूल नीति (2022 से सितंबर 2026 तक भी लागू)
अधिकतम 25%
सैन्य मामलों के विभाग के पास विचाराधीन प्रस्तावित संशोधन (अभी स्वीकृत नहीं)
नौसेना ~75%, सेना और वायुसेना ~50% (प्रस्ताव, कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की मंजूरी शेष)
केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में कांस्टेबल/राइफलमैन पदों पर भूतपूर्व अग्निवीरों के लिए आरक्षण कोटा
2022 में घोषित
10%
गृह मंत्रालय के अगस्त 2026 राज्यसभा/लोकसभा जवाब के अनुसार
50%
चार साल, एक एकमुश्त राशि, 75% के लिए पेंशन नहीं — और बरकरार-दर बढ़ाने का वादा अब भी सिर्फ प्रस्ताव है।
भारत के सैनिकों के लिए एक नया समझौता
14 जून 2022 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अग्निपथ योजना को मंजूरी दी, जिसके तहत सेना, नौसेना और वायुसेना में जवानों की भर्ती चार साल की तय अवधि की सेवा में बदल दी गई। भर्ती के लिए उम्र 17.5 से 21 वर्ष रखी गई (जो विरोध के बाद 2022 की भर्ती के लिए 23 वर्ष तक बढ़ाई गई)। चार साल पूरे होने पर मेरिट के आधार पर अधिकतम 25% अग्निवीरों को ही स्थायी सेवा में रखा जाना है; बाकी लगभग 75% को बिना पेंशन और ग्रैच्युटी के, उनके व सरकार के बराबर अंशदान और उस पर जमा ब्याज से बनी लगभग ₹11-12 लाख की कर-मुक्त 'सेवा निधि' राशि के साथ सेवा छोड़नी होती है। सेवा के दौरान मृत्यु होने पर परिवार को लगभग ₹1 करोड़ (₹48 लाख का गैर-अंशदायी बीमा, ₹44 लाख अनुग्रह राशि, और बची हुई सेवा-अवधि का वेतन व सेवा निधि जोड़कर) मिलता है, और दिव्यांगता की स्थिति में गंभीरता के अनुसार ₹44/25/15 लाख तक की सहायता तय है। एक सामान्य परिवार के लिहाज से यह बदलाव बड़ा है — पहले भर्ती होने का मतलब करीब-करीब एक स्थायी, पेंशन वाली सरकारी नौकरी था; अब इसका मतलब है चार साल की तय अवधि, एक एकमुश्त राशि, और यह वास्तविक संभावना कि 22 साल की उम्र में बिना पेंशन के फिर से नौकरी की तलाश करनी पड़े।
शुरुआत में हुआ विरोध वास्तविक था
योजना की घोषणा के दो दिन के भीतर ही बिहार और उत्तर प्रदेश में हिंसक विरोध-प्रदर्शन भड़क उठे। बिहार के बक्सर में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने रेलवे स्टेशन पर जमा होकर पटरियां जाम कर दीं, जिससे कई ट्रेनें बाहरी सिग्नल पर अटक गईं; भभुआ और छपरा स्टेशनों पर खड़ी बोगियां आग के हवाले कर दी गईं, और पटना-गया व बरौनी-कटिहार जैसे प्रमुख रूटों पर पटरियां रोकी गईं। नवादा में भाजपा विधायक अरुणा देवी की गाड़ी पर पत्थरबाजी हुई, उनका पार्टी-झंडा फाड़ दिया गया, और इस हमले में वे, उनके ड्राइवर, दो सुरक्षाकर्मी और दो अन्य कर्मचारी — कुल छह लोग जख्मी हुए। उत्तर प्रदेश में भी प्रदर्शनकारियों ने ट्रेनें, बसें और एक पुलिस चौकी तक फूंक दी। सेना अभ्यर्थियों की मुख्य नाराजगी थी: कम से कम 75% कर्मियों के लिए अनिवार्य रूप से चार साल बाद सेवा-मुक्ति और उसके साथ किसी पेंशन का न होना, साथ ही सिर्फ चार साल की सेवा को करियर के लिहाज से असुरक्षित मानना। सरकार ने कुछ ही दिनों में जवाब देते हुए 2022 की भर्ती के लिए ऊपरी उम्र-सीमा 21 से 23 वर्ष कर दी और केंद्रीय व राज्य पुलिस बलों में अग्निवीरों के लिए आरक्षण की घोषणाएं शुरू कीं। यह विरोध दर्ज इतिहास का हिस्सा है, इसे छिपाने की कोई वजह नहीं है — योजना की शुरुआत वास्तव में उथल-पुथल भरी रही।
अब तक क्या बदला — और क्या अब भी तय नहीं हुआ
यहां लागू हो चुके बदलावों और अब भी प्रस्ताव-स्तर पर अटके बदलावों में फर्क करना जरूरी है। जो लागू हो चुका है: गृह मंत्रालय ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (BSF, CRPF, CISF, SSB, असम राइफल्स) में कांस्टेबल/राइफलमैन पदों पर भूतपूर्व अग्निवीरों का आरक्षण 2022 के 10% से बढ़ाकर 50% कर दिया है — यह जानकारी गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने 6 अगस्त 2026 को संसद में लिखित जवाब में दी। कई राज्यों (जैसे उत्तर प्रदेश) ने अपनी पुलिस भर्ती में भी अलग से कोटा जोड़ा है, और CISF ने अग्निवीरों को किन क्षेत्रों में खपाया जाए, यह तय करने के लिए अपनी अलग समिति बनाई है। जो अब भी सिर्फ प्रस्ताव है: पहला बैच (करीब 46,000 अग्निवीर) अक्टूबर-नवंबर 2026 में अपने चार साल पूरे कर रहा है, और इसे देखते हुए नौसेना ने अपने अग्निवीरों में से लगभग 75% को स्थायी सेवा में रखने का प्रस्ताव दिया है, जबकि सेना और वायुसेना ने लगभग 50% तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है — लेकिन सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मार्च 2025 में ही कहा था कि इसे 50% तक बढ़ाने का फैसला अभी जल्दबाजी होगी और दिसंबर 2026 के करीब ही स्पष्ट तस्वीर बनेगी। मध्य-2026 की रिपोर्टों के अनुसार रक्षा मंत्रालय के सैन्य मामलों के विभाग ने प्रस्ताव के पहले स्वरूप को दोबारा समीक्षा के लिए लौटा दिया था, और कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी की मंजूरी की कोई पुष्ट खबर अभी तक सामने नहीं आई है। यानी जिन्हें सेवा से बाहर होना है, उनके लिए सुरक्षा-जाल असल में बढ़ा है, लेकिन बरकरार रखने की दर बढ़ाने का मूल वादा अब भी एक जीवंत, अनसुलझा प्रस्ताव है — पूरा हो चुका सुधार नहीं। सेनाध्यक्ष के अनुसार छुट्टी की नीति और हताहत-मुआवजे को नियमित सैनिकों के बराबर करने पर भी समीक्षा जारी है।
अफवाह बनाम असली आलोचना
PIB की फैक्ट-चेक यूनिट ने अग्निपथ योजना को लेकर फैलाई गई पूरी तरह मनगढ़ंत बातों को बार-बार गलत साबित किया है — जून 2022 का एक फर्जी रक्षा मंत्रालय पत्र, यह झूठा दावा कि योजना को 'सैनिक समान योजना' के नाम से फिर से शुरू किया गया, यह गलत दावा कि भर्ती किसी निजी एजेंसी से कराई जाएगी, और सबसे हाल में 2026 में वायरल हुआ एक फर्जी नोटिस जिसमें दावा किया गया कि सेना ने अग्निवीरों के नियम बदल दिए हैं। ये सभी दावे PIB द्वारा स्पष्ट रूप से फर्जी घोषित किए गए। लेकिन यह उन असली, अब भी खुली आलोचनाओं से बिल्कुल अलग मामला है जो ऊपर दर्ज हैं — 75% कर्मियों को पेंशन न मिलना, करियर की अनिश्चितता, और बरकरार रखने की दर पर अनसुलझा सवाल। किसी फैक्ट-चेक हो चुकी अफवाह को असली नीतिगत बहस के साथ मिला देना, दोनों तरफ से बेईमानी होगी। बड़े स्तर पर देखें तो अग्निपथ के पीछे सेनाओं का मूल तर्क था — एक युवा, तकनीक के साथ जल्दी घुल-मिल जाने वाला बल तैयार करना और पेंशन के बढ़ते खर्च को थामना, जो रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा खाने लगा था। सेनाध्यक्ष का यह तर्क कि तेज़ी से बदलती हथियार-प्रणालियों को अपनाने में युवा अग्निवीर ज्यादा सक्षम हैं, अब उसी वजह से ज्यादा प्रशिक्षित अग्निवीरों को रोके रखने की मांग का आधार बना है। बरकरार रखने की दर असल में बढ़ती है या नहीं, यही तय करेगा कि अग्निपथ सेनाओं के लिए कौशल और अनुभव की सच्ची कड़ी बनता है, या सिर्फ भर्ती का एक सस्ता रास्ता बनकर रह जाता है — यह एक खुला सवाल है जिस पर कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी के फैसले के बाद फिर नज़र डालने की जरूरत होगी।
स्रोत
- In a transformative reform, Cabinet clears 'AGNIPATH' scheme for recruitment of youth in the Armed ForcesPress Information BureauOfficial / primary source
- PIB Fact Check: fake notification claiming revised Agniveer rules under Agnipath schemePIB Fact CheckOfficial / primary source
- Trains set on fire as protests sparked by Centre's Agnipath scheme turn violent in BiharCareers360 (via news wire)Reputable media
- Agnipath protests turn violent in UP as protesters torch police outpost, trains, busesDeccan HeraldReputable media
- Agnipath scheme: Indian Air Force receives 2.72 lakh applications in 7 daysThe TribuneReputable media
- Indian Navy wants 75 pc, Army and IAF 50 pc: Why armed forces are seeking bigger Agniveer retention poolThe WeekReputable media
- 'Agnipath proving to be a great success': Army chief says leave, casualty benefits, age limit under reviewBusiness TodayReputable media
- Finding jobs for Agniveers: CISF forms committee to assess ways to induct them into forceThePrintReputable media
आख़िरी बार सत्यापित: 30 सित॰ 2026
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