CAG को पता चला: GST क्षतिपूर्ति सेस के ₹47,272 करोड़ कानून के मुताबिक राज्यों के लिए तय फंड में नहीं गए
प्रकाशित: 16 सित॰ 2026
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समर्पित फंड में कम भेजा गया GST क्षतिपूर्ति सेस
GST में राज्यों से किया गया क्षतिपूर्ति का वादा कानून में एक ख़ास तरीके से दर्ज था — एक समर्पित फंड, जो एक समर्पित सेस से भरा जाता, और जिसे सिर्फ़ राज्यों की क्षतिपूर्ति पर ख़र्च करना था। इसके शुरुआती दो सालों में ही, CAG को पता चला कि लगभग ₹47,272 करोड़ का यह सेस असल में उस फंड में डाला ही नहीं गया। सरकार मानती है कि पैसा ट्रांसफ़र नहीं हुआ; पर वह इस बात से असहमत है कि इसे वादा तोड़ना कहा जाए।
GST किस वादे पर टिका था
जब 1 जुलाई 2017 को वस्तु एवं सेवा कर (GST) ने ज़्यादातर केंद्रीय और राज्य अप्रत्यक्ष करों की जगह ली, तो राज्यों ने अपनी कई स्वतंत्र कर-शक्तियां एक ख़ास कानूनी गारंटी के बदले छोड़ी: अगर किसी राज्य का GST राजस्व तय 14% सालाना वृद्धि से धीमा बढ़े, तो केंद्र पांच साल तक वह अंतर पूरा करेगा। GST (राज्यों को क्षतिपूर्ति) अधिनियम, 2017 ने इसे लक्ज़री और 'सिन' सामान (जैसे कार, तंबाकू और कार्बोनेटेड पेय) पर लगे GST क्षतिपूर्ति सेस से फंड किया, जिसे कानूनी रूप से एक समर्पित, नॉन-लैप्सेबल GST क्षतिपूर्ति सेस फंड में डालना ज़रूरी था — यह वह पैसा था जिसे संसद ने पहले ही सिर्फ़ इस एक मकसद के लिए अलग रख दिया था, सामान्य सरकारी ख़र्च के लिए नहीं।
CAG को क्या मिला
केंद्र सरकार के खातों के एक CAG ऑडिट में पाया गया कि GST के शुरुआती दो सालों में, केंद्र ने जमा हुए पूरे क्षतिपूर्ति सेस को कानून के मुताबिक उस समर्पित फंड में ट्रांसफ़र नहीं किया। 2017-18 में ₹6,466 करोड़ कम भेजा गया; 2018-19 में यह कमी ₹40,806 करोड़ की थी — कुल मिलाकर ₹47,272 करोड़। CAG का निष्कर्ष स्पष्ट था: यह पैसा, जो कानूनी रूप से राज्यों की क्षतिपूर्ति के लिए तय था, इसके बजाय सरकार की सामान्य समेकित निधि (Consolidated Fund of India) में रखा गया और अन्य मकसदों पर ख़र्च हुआ, जिसे CAG ने अधिनियम की अपनी फंडिंग व्यवस्था के उल्लंघन के रूप में बताया।
सरकार का जवाब
वित्त मंत्रालय ने यह नहीं नकारा कि सेस की रकम कम भेजी गई थी। ऑडिट पर अपने जवाब में (फ़रवरी 2020 में रिपोर्ट हुआ) उसने कहा कि जो सेस राशि एक साल में ट्रांसफ़र नहीं हुई, वह अगले साल ट्रांसफ़र कर दी जाएगी। जब पत्रकारों ने इसे 'डायवर्शन' (गलत दिशा में ख़र्च) कहने पर सवाल किए, तो वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने इस ख़ास शब्द पर आपत्ति जताई, और इस अंतर को राज्यों के लिए तय पैसे का डायवर्शन नहीं, बल्कि क्षतिपूर्ति राशि की सुलह (reconciliation) की प्रक्रिया के दौरान अस्थायी रोक बताया। इस स्पष्टीकरण पर CAG का अपना जवाब यह था कि पैसे को बाद के साल में ट्रांसफ़र करने के लिए ख़ुद संसद की नई मंज़ूरी चाहिए होगी — यानी यह कमी अपने-आप सुलझने वाली कोई सामान्य समय-अंतर नहीं थी, और उसने तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की। दोनों पक्ष इस ईमानदार रिकॉर्ड का हिस्सा हैं: सरकार यह नहीं मानती कि पैसा गलत जगह ख़र्च हुआ; वह सिर्फ़ इससे असहमत है कि 'देरी' को 'गलत इस्तेमाल' पढ़ा जाए।
स्रोत
- Centre used GST compensation cess elsewhere, violated law: CAGThe Free Press JournalReputable media
- Temporary Retention Of GST Cess Pending Reconciliation Not Diversion: FinMinBusinessworldReputable media
आख़िरी बार सत्यापित: 22 सित॰ 2026
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