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खेलो इंडिया: फंडिंग आठ गुना बढ़ी, लेकिन जमीनी बुनियादी ढांचा अभी भी मंजूरी और पूर्णता के बीच फंसा

प्रकाशित: 30 सित॰ 2026

अप्रैल 2016जुल॰ 2026

पहले बनाम अभी

खेलो इंडिया वार्षिक बजट आवंटन

2016 (शुरुआत)

₹97.52 करोड़

2025-26 बजट आवंटन

₹1,000 करोड़

योजना-अवधि का कुल परिव्यय

2017-18 से 2019-20 (पहला पुनर्गठित दौर)

₹1,756 करोड़

2026-27 से 2030-31 (खेलो इंडिया स्कीम + ANSF, संयुक्त)

₹36,441 करोड़

खेलो इंडिया यूथ गेम्स में भागीदारी

2018 (पहली स्कूल गेम्स)

3,507 खिलाड़ी

2025 खेलो इंडिया यूथ गेम्स

10,000+ खिलाड़ी

जिला-स्तरीय खेलो इंडिया केंद्र

2018 से पहले (योजना-पूर्व)

समर्पित जिला-स्तरीय नेटवर्क नहीं

अधिसूचित (679 जिलों में)

1,000 केंद्र

बजट में तेज बढ़ोतरी असली है; हर स्वीकृत केंद्र का जमीन पर पूरा बनना अभी भी बाकी है।

योजना और उसका बजट-इतिहास

खेलो इंडिया, राजीव गांधी खेल अभियान, शहरी खेल बुनियादी ढांचे के लिए सहायता, और राष्ट्रीय खेल प्रतिभा खोज योजना — इन तीन पुरानी योजनाओं को मिलाकर 2016-17 में एक छत्र कार्यक्रम के रूप में बनाई गई थी। सार्वजनिक रूप से इसकी पहचान जनवरी-फरवरी 2018 में हुई पहली खेलो इंडिया स्कूल गेम्स से बनी, जब सितंबर 2017 में मंत्रिमंडल ने इसे 2017-18 से 2019-20 के लिए ₹1,756 करोड़ के पुनर्गठित रूप में मंजूरी दी। बजट के आंकड़े बताते हैं कि 2016 में आवंटन मात्र ₹97.52 करोड़ था, जो 2020 के बजट अनुमान में ₹890.92 करोड़ तक पहुंच गया — यानी शुरुआती चार वर्षों में लगभग नौ गुना बढ़ोतरी। इसके बाद भी बढ़ोतरी जारी रही: 2021-22 के लिए बजट अनुमान ₹657.71 करोड़ था, 2022-23 में यह ₹596.39 करोड़ से बढ़कर वास्तविक आवंटन में पहुंचा, 2023-24 में ₹1,000 करोड़ बजट अनुमान रखा गया (जिसे बाद में संशोधित अनुमान में ₹880 करोड़ किया गया), 2024-25 में ₹900 करोड़, और 2025-26 में ₹1,000 करोड़। जुलाई 2026 में मंत्रिमंडल ने खेलो इंडिया स्कीम के एक बड़े पुनर्गठित संस्करण को मंजूरी दी — 2026-27 से 2030-31 तक के लिए खेलो इंडिया स्कीम और राष्ट्रीय खेल महासंघों को बढ़ी हुई सहायता (ANSF) को मिलाकर ₹36,441 करोड़ का संयुक्त परिव्यय, जिसे सरकारी विवरण में पिछली योजना अवधि की तुलना में 'लगभग आठ गुना' बताया गया है।

बुनियादी ढांचा: स्वीकृति और वास्तविक निर्माण के बीच का फासला

योजना के तहत देश भर के 679 जिलों (36 राज्यों/केंद्र-शासित प्रदेशों में) में 1,000 खेलो इंडिया केंद्र अधिसूचित किए गए हैं, हर जिले में कम से कम एक — मूल लक्ष्य था इन्हें वित्त वर्ष 2023-24 तक स्थापित करना। इसके अलावा 31 राज्यों/केंद्र-शासित प्रदेशों में 32 खेलो इंडिया राज्य उत्कृष्टता केंद्र (KISCE) अधिसूचित हैं, और 23 राज्यों/केंद्र-शासित प्रदेशों में 296 खेल अकादमियों को मान्यता दी गई है। लेकिन 'अधिसूचित' और 'वास्तव में चालू' एक जैसे नहीं हैं — जम्मू-कश्मीर का ही उदाहरण लें, जहां स्वीकृत 100 छोटे खेलो इंडिया केंद्रों में से 92 फिलहाल कार्यरत हैं, यानी लगभग 8% अंतर एक ही केंद्र-शासित प्रदेश में। देश भर में अधिसूचित बनाम वास्तव में चालू केंद्रों का कोई एक समेकित सरकारी आंकड़ा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, इसलिए राष्ट्रीय स्तर पर यह अंतर कितना बड़ा है, यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता — लेकिन जो राज्य-स्तरीय आंकड़े मौजूद हैं, वे यह पुष्टि करते हैं कि यह अंतर वास्तविक है, काल्पनिक नहीं।

खर्च का सच: आवंटन से कम इस्तेमाल के शुरुआती वर्ष

संसद की एक स्थायी समिति ने पाया कि योजना के शुरुआती वर्षों में वास्तविक खर्च आवंटित राशि से काफी कम रहा — 2018-19 में ₹520 करोड़ आवंटित हुए पर सिर्फ ₹324 करोड़ खर्च हुए, और 2019-20 में ₹500 करोड़ आवंटित होने पर सिर्फ ₹318 करोड़ खर्च हुआ। समिति ने खेल विभाग द्वारा 'अपर्याप्त धन, मानव संसाधन और खेल बुनियादी ढांचे' को क्रियान्वयन में बाधा बताए जाने पर टिप्पणी की कि विभाग को पहले मौजूदा आवंटित राशि का पूरा इस्तेमाल करना चाहिए, फिर अतिरिक्त संसाधन जुटाने की बात सोचनी चाहिए। समिति ने यह भी पाया कि खेल बुनियादी ढांचे के विकास के लिए अनुदान केवल 13 राज्यों को मिला, जबकि बिहार, झारखंड और ओडिशा — जिन्हें विकास की जरूरत के तौर पर पहचाना गया था — को कोई अनुदान नहीं मिला। यह असमानता और शुरुआती अंडरस्पेंडिंग दोनों ईमानदारी से दर्ज किए जाने लायक तथ्य हैं, न कि किसी योजना की सामान्य सफलता की कहानी में छुपाने लायक विवरण।

भागीदारी और प्रतिभा-पहचान ढांचा

खेलो इंडिया गेम्स — स्कूल, युवा और विश्वविद्यालय स्तर पर — मेडल जीतने से पहले जमीनी भागीदारी बढ़ाने की कोशिश हैं। 2018 में पहली खेलो इंडिया स्कूल गेम्स में 3,507 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था; 2025 की खेलो इंडिया यूथ गेम्स में 28 राज्यों और 8 केंद्र-शासित प्रदेशों से 10,000 से अधिक खिलाड़ी शामिल हुए, और 2025 की खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स में 230 से अधिक विश्वविद्यालयों के लगभग 5,000 खिलाड़ियों ने भाग लिया। सरकार के अनुसार 2018 से अब तक 63,000 से अधिक खिलाड़ी इन खेलों में हिस्सा ले चुके हैं। प्रतिभा-पहचान की तरफ, दिसंबर 2024 तक करीब 2,781 खिलाड़ियों को 'खेलो इंडिया एथलीट' के रूप में चुना गया था, जिन्हें कोचिंग, उपकरण, चिकित्सा सहायता और मासिक भत्ता मिलता है; नई खेलो इंडिया राइजिंग टैलेंट आइडेंटिफिकेशन (KIRTI) पहल के तहत 3,62,683 पंजीकरण हुए और लगभग 51,000 आकलन पूरे हुए। जुलाई 2026 की पुनर्गठित योजना में एक नई 'इमर्जिंग खेलो इंडिया एथलीट' श्रेणी शामिल की गई है, जिसे संगठित कोचिंग ढांचे में शामिल खिलाड़ियों की संख्या को लगभग दस गुना बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है — यह एक घोषित लक्ष्य है, अभी तक हासिल किया गया परिणाम नहीं।

खेलो इंडियाखेल बुनियादी ढांचायुवा विकासकेंद्रीय बजट

स्रोत

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आख़िरी बार सत्यापित: 30 सित॰ 2026

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