PM उज्ज्वला: रसोई गैस की पहुँच लगभग सार्वभौमिक, पर औसत परिवार साल में पौने पाँच सिलेंडर ही भरवाता है
प्रकाशित: 1 अक्टू॰ 2026
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एलपीजी कवरेज
मई 2016
61.9%
2018-19
94.3%
उज्ज्वला उपभोक्ता: औसत वार्षिक रिफ़िल
सक्रिय उज्ज्वला लाभार्थी (1 जुलाई 2026)
उज्ज्वला ने गैस कनेक्शन देने का काम बड़े पैमाने पर किया, पर असली कसौटी हर महीने की रिफ़िल है, जहाँ तस्वीर अब भी अधूरी है।
कनेक्शन: जो हुआ
PRS लेजिस्लेटिव रिसर्च के संकलन के अनुसार देश में एलपीजी कवरेज मई 2016 में 61.9% था, 2016-17 में 72.8%, 2017-18 में 80.9% और 2018-19 में 94.3%। लोकसभा में पेट्रोलियम राज्य मंत्री के लिखित उत्तर के अनुसार 1 जुलाई 2026 तक लगभग 10.58 करोड़ उज्ज्वला लाभार्थी सक्रिय हैं। नीति आयोग के अप्रैल 2026 के मूल्यांकन के हवाले से सरकार ने बताया कि 86.59% उज्ज्वला परिवार एलपीजी को अपना मुख्य खाना पकाने का ईंधन बताते हैं, और 74.27% ने घर के भीतर प्रदूषण कम होने की बात कही।
रिफ़िल: जहाँ असली परीक्षा है
कैग की दिसंबर 2019 की रिपोर्ट ने पाया था कि उज्ज्वला लाभार्थी औसतन गैर-उज्ज्वला उपभोक्ताओं की लगभग आधी रिफ़िल लेते थे। PRS के अनुसार उज्ज्वला उपभोक्ताओं की औसत वार्षिक रिफ़िल 2016-17 में 3.9, 2017-18 में 3.4 और 2018-19 में 3.0 थी। सरकार के अनुसार 2025-26 में प्रति उज्ज्वला उपभोक्ता औसत खपत 4.71 सिलेंडर रही: 2018-19 से सुधार, पर अब भी साल में पाँच से कम। लोकसभा के उसी उत्तर के हवाले से रिपोर्ट के अनुसार लाखों लाभार्थियों ने 2025-26 में चार या कम सिलेंडर खरीदे और कुछ ने एक भी रिफ़िल नहीं ली। ‘फ़्यूल स्टैकिंग’ (गैस के साथ लकड़ी/कंडे का भी इस्तेमाल) व्यापक बताई गई है।
सब्सिडी में कटौती (जून 2026)
उज्ज्वला उपभोक्ताओं को प्रति सिलेंडर ₹300 की अतिरिक्त लक्षित सब्सिडी मिलती है। जून 2026 में इसे 9 की जगह साल में 4 रिफ़िल तक सीमित किया गया। सरकार का तर्क है कि 2025-26 में औसत रिफ़िल पाँच से कम रही, इसलिए चार रिफ़िल तक की सब्सिडी ‘लक्ष्यीकरण’ के लिहाज़ से उचित है। सरकार ने 24 जुलाई 2026 को लोकसभा में बताया कि जून 2026 में प्रति सिलेंडर ₹700 से अधिक और जुलाई में ₹500 से अधिक की अंडर-रिकवरी हुई। दिल्ली में उज्ज्वला उपभोक्ता का प्रभावी मूल्य ₹642 बताया गया (बाज़ार-आधारित ₹1,695 के मुकाबले खुदरा ₹942 और ₹300 की सब्सिडी)। यह उत्तर एक विपक्षी सांसद के प्रश्न के जवाब में दिया गया। इस बात की सीधी पुष्टि नहीं हुई कि कटौती से रिफ़िल और घटेंगी या नहीं।
आम परिवार और देश के लिए मतलब
एक रसोई के लिए इसका अर्थ है धुएँ में कमी की संभावना, और यह तब तक पूरा नहीं होता जब तक सिलेंडर बार-बार भरवाया न जाए। ₹642 का प्रभावी मूल्य कई परिवारों के मासिक बजट के लिए भारी हो सकता है, और 2025-26 का औसत 4.71 सिलेंडर यही संकेत देता है कि बहुत-से परिवार गैस के साथ दूसरा ईंधन भी जलाते हैं। देश के स्तर पर, 10.58 करोड़ लाभार्थी लगभग हर तीसरे परिवार के बराबर हैं (भारत के लगभग 30 करोड़ परिवारों के अनुमान पर, साइट की अपनी गणना)। ऊर्जा-सुरक्षा के पहलू से, इस साइट की ‘पश्चिम एशिया संघर्ष और एलपीजी’ प्रविष्टि भी देखें, जो बताती है कि एलपीजी आयात और कीमतों पर निर्भरता उज्ज्वला के लिए जोखिम भी है।
जो अभी अधूरा है
यह प्रविष्टि इस पर कोई निर्णय नहीं देती कि 4 रिफ़िल की सीमा उचित लक्ष्यीकरण है या कमज़ोर परिवारों पर बोझ। लाभार्थी-संख्या के आँकड़े भी स्रोतों में अलग-अलग मिलते हैं (कुछ द्वितीयक स्रोत इससे अधिक कुल कनेक्शन बताते हैं); यहाँ केवल लोकसभा में दिया गया 10.58 करोड़ का सक्रिय-लाभार्थी आँकड़ा इस्तेमाल हुआ है। रिफ़िल-व्यवहार पर राज्यवार, स्वतंत्र आँकड़े हमें इस पूरे दशक के लिए नहीं मिले।
स्रोत
- Govt says 86.6% Ujjwala households now use LPG as primary fuel, defends 9 to 4 refills subsidy cutThePrintReputable media
- Pradhan Mantri Ujjwala YojanaPRS Legislative ResearchReputable media
- Pradhan Mantri Ujjwala SchemeVajiram & RaviSecondary source
आख़िरी बार सत्यापित: 1 अक्टू॰ 2026
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